Love Poetry (page 157)

किस से मिलने जाओ अब किस से मुलाक़ातें करो

एजाज़ उबैद

जो जा चुके हैं ग़ालिबन उतरें कभी ज़ीना तिरा

एजाज़ उबैद

ग़म भी उतना नहीं कि तुम से कहें

एजाज़ उबैद

गले लग कर मिरे वो जाने हँसता था कि रोता था

एजाज़ उबैद

दूसरों की आँख ले कर भी पशेमानी हुई

एजाज़ उबैद

धुँद का आँखों पर होगा पर्दा इक दिन

एजाज़ उबैद

अभी तमाम आइनों में ज़र्रा ज़र्रा आब है

एजाज़ उबैद

पाया न कुछ ख़ला के सिवा अक्स-ए-हैरती

एजाज़ गुल

दिनों महीनों आँखें रोईं नई रुतों की ख़्वाहिश में

एजाज़ गुल

धूप जवानी का याराना अपनी जगह

एजाज़ गुल

निशान-ए-ज़िंदगी

एजाज़ गुल

उसी जन्नत जहन्नम में मरूँगा

एजाज़ गुल

थम गई वक़्त की रफ़्तार तिरे कूचे में

एजाज़ गुल

सूरत-ए-सहर जाऊँ और दर-ब-दर जाऊँ

एजाज़ गुल

क़ाफ़िला उतरा सहरा में और पेश वही मंज़र आए

एजाज़ गुल

फैला अजब ग़ुबार है आईना-गाह में

एजाज़ गुल

पेचाक-ए-उम्र अपने सँवार आइने के साथ

एजाज़ गुल

नहीं शौक़-ए-ख़रीदारी में दौड़े जा रहा है

एजाज़ गुल

महमिल है मतलूब न लैला माँगता है

एजाज़ गुल

कभी क़तार से बाहर कभी क़तार के बीच

एजाज़ गुल

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है

एजाज़ गुल

इस्तादा है जब सामने दीवार कहूँ क्या

एजाज़ गुल

हम तुम जब भी प्यार करेंगे जान-ओ-दिल सदक़े होंगे

एजाज़ गुल

गलियों में भटकना रह-ए-आलाम में रहना

एजाज़ गुल

ढूँढता हूँ रोज़-ओ-शब कौन से जहाँ में है

एजाज़ गुल

ढूँढता हूँ रोज़-ओ-शब कौन से जहाँ में है

एजाज़ गुल

दर खोल के देखूँ ज़रा इदराक से बाहर

एजाज़ गुल

अक्स उभरा न था आईना-ए-दिल-दारी का

एजाज़ गुल

तंहाई

एजाज़ फ़ारूक़ी

तकमील

एजाज़ फ़ारूक़ी