Love Poetry (page 159)
तिरे बदन की नज़ाकतों का हुआ है जब हम-रिकाब मौसम
एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
शुऊर-ए-नौ-उम्र हूँ न मुझ को मता-ए-रंज-ओ-मलाल देना
एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
हुसूल-ए-मक़्सद में आख़िरश यूँ रहेगी क़िस्मत दख़ील कब तक
एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी
दिल ने चुपके से कहा कोशिश-ए-नाकाम के बाद
एहतिशाम हुसैन
उन आँखों को नज़र क्या आ गया है
एहतिशाम हुसैन
तुझे पसंद जो दिल की लगन नहीं आई
एहतिशाम हुसैन
कुछ मिरे शौक़ ने दर-पर्दा कहा हो जैसे
एहतिशाम हुसैन
ग़म में इक मौज सरख़ुशी की है
एहतिशाम हुसैन
गया था बज़्म-ए-मोहब्बत में ख़ाली जाम लिए
एहतिशाम हुसैन
देख कर जादा-ए-हस्ती पे सुबुक-गाम मुझे
एहतिशाम हुसैन
डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ
एहतिशाम हुसैन
अक़्ल पहुँची जो रिवायात के काशाने तक
एहतिशाम हुसैन
दिल-ए-बर्बाद को छोटा सा मकाँ भी देगा
एहतिशाम अख्तर
चराग़ दिल का था रौशन बुझा गया पानी
एहतिशाम अख्तर
तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद
एहतराम इस्लाम
तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद
एहतराम इस्लाम
सुर्ख़ मौसम की कहानी है पुरानी हो न हो
एहतराम इस्लाम
मुंतशिर हर शय क़रीने से सजा दी जाएगी
एहतराम इस्लाम
फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली
एहतराम इस्लाम
फ़ज़ा-ए-शाम ज़िया-ए-सहर उसी से मिली
एहतराम इस्लाम
ढूँड साया न शजर आगे भी
एहतराम इस्लाम
ढूँड साया न शजर आगे भी
एहतराम इस्लाम
बज़्म-ए-तन्हाई में अक्स-ए-शो'ला-पैकर था कोई
एहतराम इस्लाम
रिश्ते की सच्चाई
एहसान साक़िब
ज़िंदगी इक आग है वो आग जलना चाहिए
एहसान जाफ़री
तुम अच्छे मसीहा हो दवा क्यूँ नहीं देते
एहसान जाफ़री
जज़्बात की शिद्दत से निखरता है बयाँ और
एहसान जाफ़री
शायद अभी बाक़ी है कुछ आग मोहब्बत की
एहसान दरबंगावी
नज़र आती है सारी काएनात-ए-मै-कदा रौशन
एहसान दरबंगावी
बड़ी मुश्किलों से काटा बड़े कर्ब से गुज़ारा
एहसान दरबंगावी