Love Poetry (page 160)
याद तेरी जो कभी आती है बहलाने को
एहसान दरबंगावी
ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ
एहसान दरबंगावी
बात अब आई समझ में कि हक़ीक़त क्या थी
एहसान दरबंगावी
शोरिश-ए-इश्क़ में है हुस्न बराबर का शरीक
एहसान दानिश
सता लो मुझे ज़िंदगी में सता लो
एहसान दानिश
न जाने मोहब्बत का अंजाम क्या है
एहसान दानिश
मक़्सद-ए-ज़ीस्त ग़म-ए-इश्क़ है सहरा हो कि शहर
एहसान दानिश
कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम
एहसान दानिश
हुस्न को दुनिया की आँखों से न देख
एहसान दानिश
हाँ आप को देखा था मोहब्बत से हमीं ने
एहसान दानिश
दमक रहा है जो नस नस की तिश्नगी से बदन
एहसान दानिश
यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था
एहसान दानिश
यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे
एहसान दानिश
वफ़ाएँ कर के जफ़ाओं का ग़म उठाए जा
एहसान दानिश
तौबा की नाज़िशों पे सितम ढा के पी गया
एहसान दानिश
सोज़-ए-जुनूँ को दिल की ग़िज़ा कर दिया गया
एहसान दानिश
रंग-ए-तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के शनासा हम भी हैं
एहसान दानिश
रानाई-ए-कौनैन से बे-ज़ार हमीं थे
एहसान दानिश
रहे जो ज़िंदगी में ज़िंदगी का आसरा हो कर
एहसान दानिश
परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं
एहसान दानिश
नज़र फ़रेब-ए-क़ज़ा खा गई तो क्या होगा
एहसान दानिश
न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को
एहसान दानिश
मिरे मिटाने की तदबीर थी हिजाब न था
एहसान दानिश
मौसम से रंग-ओ-बू हैं ख़फ़ा देखते चलो
एहसान दानिश
कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर
एहसान दानिश
कल रात कुछ अजीब समाँ ग़म-कदे में था
एहसान दानिश
कभी कभी जो वो ग़ुर्बत-कदे में आए हैं
एहसान दानिश
जो ले के उन की तमन्ना के ख़्वाब निकलेगा
एहसान दानिश
जीने के लिए जो मर रहे हैं
एहसान दानिश
जबीं की धूल जिगर की जलन छुपाएगा
एहसान दानिश