Love Poetry (page 232)
फ़िक्र
असरार-उल-हक़ मजाज़
ए'तिराफ़
असरार-उल-हक़ मजाज़
एक जिला-वतन की वापसी
असरार-उल-हक़ मजाज़
एक ग़मगीन याद
असरार-उल-हक़ मजाज़
एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर
असरार-उल-हक़ मजाज़
दिल्ली से वापसी
असरार-उल-हक़ मजाज़
बोल! अरी ओ धरती बोल!
असरार-उल-हक़ मजाज़
ब-जवाब-ए-पंद-नामा
असरार-उल-हक़ मजाज़
अयादत
असरार-उल-हक़ मजाज़
अँधेरी रात का मुसाफ़िर
असरार-उल-हक़ मजाज़
आवारा
असरार-उल-हक़ मजाज़
आज की रात
असरार-उल-हक़ मजाज़
आज भी
असरार-उल-हक़ मजाज़
आज
असरार-उल-हक़ मजाज़
आहंग-ए-नौ
असरार-उल-हक़ मजाज़
यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
ये तीरगी-ए-शब ही कुछ सुब्ह-तराज़ आती
असरार-उल-हक़ मजाज़
ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती
असरार-उल-हक़ मजाज़
ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी
असरार-उल-हक़ मजाज़
वो नक़ाब आप से उठ जाए तो कुछ दूर नहीं
असरार-उल-हक़ मजाज़
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए
असरार-उल-हक़ मजाज़
सीने में उन के जल्वे छुपाए हुए तो हैं
असरार-उल-हक़ मजाज़
शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
असरार-उल-हक़ मजाज़
साज़गार है हमदम इन दिनों जहाँ अपना
असरार-उल-हक़ मजाज़
सारा आलम गोश-बर-आवाज़ है
असरार-उल-हक़ मजाज़
साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
रुख़्सत ऐ हम-सफ़रो शहर-ए-निगार आ ही गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
रह-ए-शौक़ से अब हटा चाहता हूँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
परतव-ए-साग़र-ए-सहबा क्या था
असरार-उल-हक़ मजाज़
निगाह-ए-लुत्फ़ मत उठ ख़ूगर-ए-आलाम रहने दे
असरार-उल-हक़ मजाज़