Love Poetry (page 234)
शैतान का फ़रमान
असरार जामई
लीडर की दुआ
असरार जामई
ग़ज़ल-पैमाई
असरार जामई
दिल्ली दर्शन
असरार जामई
चमचे की दुआ
असरार जामई
बिजली हुई फ़ेल
असरार जामई
बकरा
असरार जामई
पहचान ज़िंदगी की समझ कर मैं चुप रहा
असरार अकबराबादी
दो-जहाँ के हुस्न का अरमान आधा रह गया
असरार अकबराबादी
वस्ल की जो ख़्वाहिश है
असरा रिज़वी
सुना है चाँदनी-रातों में अक्सर तुम
असरा रिज़वी
परदेसी का ख़त
असरा रिज़वी
ख़िज़ाँ का मौसम
असरा रिज़वी
आओ चलें उस खंडर में
असरा रिज़वी
ज़िंदगी उलझी है बिखरे हुए गेसू की तरह
असरा रिज़वी
ये आग मोहब्बत की बुझाए न बुझे है
असरा रिज़वी
वो शख़्स फिर कहानी का उन्वान बन गया
असरा रिज़वी
रात फिर ख़्वाब में आने का इरादा कर के
असरा रिज़वी
मैं तिरे शहर में फिरती रही मारी मारी
असरा रिज़वी
मैं सच तो कह दूँ पर उस को कहीं बुरा न लगे
असरा रिज़वी
कर्गस को सुरख़ाब बनाना चाहोगे
असरा रिज़वी
दर्द की जोत मिरे दिल में जगाने वाले
असरा रिज़वी
बे-सबब ख़ौफ़ से दिल मेरा लरज़ता क्यूँ है
असरा रिज़वी
ऐसा ये दर्द है कि भुलाया न जाएगा
असरा रिज़वी
आग जो दिल में लगी है वो बुझा दी जाए
असरा रिज़वी
सूख जाता है हर शजर मुझ में
असलम राशिद
मुझे दरिया बनाना चाहती है
असलम राशिद
मिरे क़दमों में दुनिया के ख़ज़ाने हैं उठा लूँ क्या
असलम राशिद
जब उस की तस्वीर बनाई जाती है
असलम राशिद
है मुअम्मा या कहानी इश्क़ है
असलम राशिद