Love Poetry (page 230)

कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से

अता आबिदी

ख़्वाब ही ख़्वाब की ताबीर हुआ तो जाना

अता आबिदी

अदब ही ज़िंदगी में जब न आया

अता आबिदी

ख़्वाब की दिल्ली

अता आबिदी

तुझ को ख़िफ़्फ़त से बचा लूँ पानी

अता आबिदी

तीरगी शम्अ बनी राहगुज़र में आई

अता आबिदी

तमाशा ज़िंदगी का रोज़ ओ शब है

अता आबिदी

सर पे सूरज हो मगर साया न हो ऐसा न था

अता आबिदी

साँसों के तआक़ुब में हैरान मिली दुनिया

अता आबिदी

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

अता आबिदी

कोई भी ख़ुश नहीं है इस ख़बर से

अता आबिदी

जागते ही नज़र अख़बार में खो जाती है

अता आबिदी

ये मेरे इश्क़ की मजबूरियाँ मआज़-अल्लाह

असरार-उल-हक़ मजाज़

या तो किसी को जुरअत-ए-दीदार ही न हो

असरार-उल-हक़ मजाज़

वक़्त की सई-ए-मुसलसल कारगर होती गई

असरार-उल-हक़ मजाज़

रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्यूँकर कहते

असरार-उल-हक़ मजाज़

रोएँ न अभी अहल-ए-नज़र हाल पे मेरे

असरार-उल-हक़ मजाज़

क्यूँ जवानी की मुझे याद आई

असरार-उल-हक़ मजाज़

कमाल-ए-इश्क़ है दीवाना हो गया हूँ मैं

असरार-उल-हक़ मजाज़

कब किया था इस दिल पर हुस्न ने करम इतना

असरार-उल-हक़ मजाज़

इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है

असरार-उल-हक़ मजाज़

हुस्न को शर्मसार करना ही

असरार-उल-हक़ मजाज़

बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है

असरार-उल-हक़ मजाज़

बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है

असरार-उल-हक़ मजाज़

ज़हराब-ए-हुस्न

असरार-उल-हक़ मजाज़

वतन-आशोब

असरार-उल-हक़ मजाज़

उन का जश्न-ए-साल-गिरह

असरार-उल-हक़ मजाज़

तिफ़्ली के ख़्वाब

असरार-उल-हक़ मजाज़

तआरुफ़

असरार-उल-हक़ मजाज़

शरारे

असरार-उल-हक़ मजाज़