Love Poetry (page 266)

उस बज़्म में क्या कोई सुने राय हमारी

अनवर शऊर

उन की सूरत हमें आई थी पसंद आँखों से

अनवर शऊर

उन से तन्हाई में बात होती रही

अनवर शऊर

तेरी सोहबत में बैठा हूँ

अनवर शऊर

सुलैमान-ए-सुख़न तो ख़ैर क्या हूँ

अनवर शऊर

'शुऊर' वक़्त पे दिल की दवा हुई होती

अनवर शऊर

शक नहीं है हमें उस बुत के ख़ुदा होने में

अनवर शऊर

रही रात उन से मुलाक़ात कम

अनवर शऊर

नहीं मिलते 'शुऊर' आँसू बहाते

अनवर शऊर

न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात गो अकेला मैं

अनवर शऊर

मुश्ताक़ ब-दस्तूर ज़माना है तुम्हारा

अनवर शऊर

मुझे ये जुस्तुजू क्यूँ हो कि क्या हूँ और किया था मैं

अनवर शऊर

मैं ख़ाक हूँ आब हूँ हवा हूँ

अनवर शऊर

मैं बज़्म-ए-तसव्वुर में उसे लाए हुए था

अनवर शऊर

मैं अपने-आप से पीछा छुड़ा के

अनवर शऊर

कुछ दिनों अपने घर रहा हूँ मैं

अनवर शऊर

कुछ दिन तो कर तआ'वुन ऐ ख़ुश-सिफ़ात मुझ से

अनवर शऊर

ख़्वाह दिल से मुझे न चाहे वो

अनवर शऊर

ख़त्म हर अच्छा बुरा हो जाएगा

अनवर शऊर

कट चुकी थी ये नज़र सब से बहुत दिन पहले

अनवर शऊर

काफ़ी नहीं ख़ुतूत किसी बात के लिए

अनवर शऊर

जो जल उठी है शबिस्ताँ में याद सी क्या है

अनवर शऊर

जो हम-कलाम हो हम से उसी के होते हैं

अनवर शऊर

इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह

अनवर शऊर

हो गए दिन जिन्हें भुलाए हुए

अनवर शऊर

हवस बला की मोहब्बत हमें बला की है

अनवर शऊर

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था

अनवर शऊर

बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है

अनवर शऊर

बशारत हो कि अब मुझ सा कोई पागल न आएगा

अनवर शऊर

और न दर-ब-दर फिरा और न आज़मा मुझे

अनवर शऊर