Love Poetry (page 268)

कासा-लेसों ने जो थी नज़्र उतारी तेरी

अनवर सदीद

हद-ए-नज़र से मिरा आसमाँ है पोशीदा

अनवर सदीद

दीवार पर लिखा न पढ़ो और ख़ुश रहो

अनवर सदीद

अपने दिल की आदत है शहज़ादों वाली

अनवर सदीद

अहद-ए-हाज़िर इक मशीन और उस का कारिंदा हूँ मैं

अनवर सदीद

आरज़ू थी ये बिखेरें अपनी किरनें सुब्ह तक

अनवर सदीद

आरज़ू ने जिस की पोरों तक था सहलाया मुझे

अनवर सदीद

रोज़ आपस में लड़ा करते हैं अर्बाब-ए-ख़िरद

अनवर साबरी

रोज़ आपस में लड़ा करते हैं अर्बाब-ए-ख़िरद

अनवर साबरी

मैं जो रोया उन की आँखों में भी आँसू आ गए

अनवर साबरी

आज़ादी के दीवाने

अनवर साबरी

ज़ुल्मतों में रौशनी की जुस्तुजू करते रहो

अनवर साबरी

ज़िंदगी के हसीं बहाने से

अनवर साबरी

वो नीची निगाहें वो हया याद रहेगी

अनवर साबरी

उन की महफ़िल में हमेशा से यही देखा रिवाज

अनवर साबरी

तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने

अनवर साबरी

तलख़ाबा-ए-ग़म ख़ंदा-जबीं हो के पिए जा

अनवर साबरी

तज्दीद-ए-रस्म-ओ-राह-ए-मुलाक़ात कीजिए

अनवर साबरी

शब-ए-फ़िराक़ की ज़ुल्मत है ना-गवार मुझे

अनवर साबरी

रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम

अनवर साबरी

निगाह-ओ-दिल से गुज़री दास्ताँ तक बात जा पहुँची

अनवर साबरी

न तन्हा नस्तरीन ओ नस्तरन से इश्क़ है मुझ को

अनवर साबरी

न होंगे हम तो ये रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा

अनवर साबरी

मुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है

अनवर साबरी

लब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद

अनवर साबरी

कुछ अबरुओं पे बल भी हैं ख़ंदा-लबी के साथ

अनवर साबरी

इश्क़ मुकम्मल ख़्वाब-ए-परेशाँ

अनवर साबरी

इश्क़ में ग़म के सिवा कोई ख़ुशी देखी नहीं

अनवर साबरी

इंक़िलाब-ए-सहर-ओ-शाम इलाही तौबा

अनवर साबरी

हासिल-ए-ग़म यही समझते हैं

अनवर साबरी