Love Poetry (page 269)

हर साँस में ख़ुद अपने न होने का गुमाँ था

अनवर साबरी

दौर-ए-हाज़िर हो गया है इस क़दर कम-आश्ना

अनवर साबरी

अता-ए-ग़म पे भी ख़ुश हूँ मिरी ख़ुशी क्या है

अनवर साबरी

तमसील

अनवर नदीम

मंज़िल-ए-शौक़

अनवर नदीम

कहीं और ही चलना होगा

अनवर नदीम

उसी अमल की ज़रा सी शराब देता चल

अनवर नदीम

शेर-ओ-सुख़न की उस महफ़िल में सब से छोटे हम ही थे

अनवर नदीम

प्यार को पा कर जो महरूमी हुई

अनवर नदीम

क्या सुनाएँ तुम्हें कोई ताज़ा ग़ज़ल

अनवर नदीम

हो सकता है कोई हमें भी ढूँडे इन बंजारों में

अनवर नदीम

मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

मैं ख़ुश हूँ अगर गुलशन के लिए कुछ मेरा लहू काम आ जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है

अनवर मिर्ज़ापुरी

वादा-ए-शाम-ए-फ़र्दा पे ऐ दिल मुझे गर यक़ीं ही न आए तो मैं क्या करूँ

अनवर मिर्ज़ापुरी

मैं तो समझा था जिस वक़्त मुझ को वो मिलेंगे तो जन्नत मिलेगी

अनवर मिर्ज़ापुरी

मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ

अनवर मिर्ज़ापुरी

इस वास्ते दामन चाक किया शायद ये जुनूँ काम आ जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

मख़मली ख़्वाब का आँखों में न मंज़र फैला

अनवर मीनाई

ख़्वाब बिखरेंगे तो हम को भी बिखरना होगा

अनवर मीनाई

जब ज़मीं के मुक़द्दर सँवर जाएँगे

अनवर मीनाई

हर मंज़र-ए-ख़ुश-रंग सुलग जाए तो क्या हो

अनवर मीनाई

बड़े सुकून से ख़ुद अपने हम-सरों में रहे

अनवर मीनाई

आज मुझे कुछ लोग मिले हैं पागल से

अनवर मीनाई

वहाँ ज़ेर-ए-बहस आते ख़त-ओ-ख़ाल ओ ख़ू-ए-ख़ूबाँ

अनवर मसूद

उर्दू से हो क्यूँ बेज़ार इंग्लिश से क्यूँ इतना प्यार

अनवर मसूद

बे-हिर्स-ओ-ग़रज़ क़र्ज़ अदा कीजिए अपना

अनवर मसूद

'अनवर' मिरी नज़र को ये किस की नज़र लगी

अनवर मसूद