Love Poetry (page 271)

कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है

अनवर जलालपुरी

ज़ुल्फ़ को अब्र का टुकड़ा नहीं लिख्खा मैं ने

अनवर जलालपुरी

शादाब-ओ-शगुफ़्ता कोई गुलशन न मिलेगा

अनवर जलालपुरी

पराया कौन है और कौन अपना सब भुला देंगे

अनवर जलालपुरी

उदासी एक लड़की है

अनवार फ़ितरत

उदासी एक लड़की है

अनवार फ़ितरत

केंचुली बदलती रात

अनवार फ़ितरत

दर्द उरूज पर आ जाए तो

अनवार फ़ितरत

भारी पेड़ों-तले

अनवार फ़ितरत

शिकस्ता-पा ही सही दूर की सदा ही सही

अनवार फ़िरोज़

हम पे ताज़ीर ये रहने दीजे

अनवार फ़िरोज़

नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत

अनवर देहलवी

गरचे क्या कुछ थे मगर आप को कुछ भी न गिना

अनवर देहलवी

बे-तरह पड़ती है नज़र उन की

अनवर देहलवी

यूसुफ़-ए-हुस्न का हुस्न आप ख़रीदार रहा

अनवर देहलवी

उन से हम लौ लगाए बैठे हैं

अनवर देहलवी

नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत

अनवर देहलवी

न मैं समझा न आप आए कहीं से

अनवर देहलवी

मोहब्बत हो तो बर्क़-ए-जिस्म-ओ-जाँ हो

अनवर देहलवी

हो रहा है टुकड़े टुकड़े दिल मेरे ग़म-ख़्वार का

अनवर देहलवी

है भी और फिर नज़र नहीं आती

अनवर देहलवी

देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था

अनवर देहलवी

अश्क बेताब व निगह बे-बाक व चश्म-ए-तर ख़राब

अनवर देहलवी

अब अपना हाल हम उन्हें तहरीर कर चुके

अनवर देहलवी

आँखें दिखाईं ग़ैर को मेरी ख़ता के साथ

अनवर देहलवी

हमारे इश्क़ और उन के तग़ाफ़ुल का ये आलम है

अनवर बरेलवी

ये सरकारी शिफ़ा-ख़ाने में जो बीमार लेटे हैं

अनवर बरेलवी

ये नर्म हाथ मरे हाथ में थमा दीजे

अनवर अंजुम

कोई सदा न दूर तलक नक़्श-ए-पा कोई

अनवर अंजुम

खिला है फूल बहुत रोज़ में मुक़द्दर का

अनवर अंजुम