Love Poetry (page 273)
ग़म सहें या ख़ुशी को प्यार करें
अंजुम सिद्दीक़ी
ये मोहब्बत का जो अम्बार पड़ा है मुझ में
अंजुम सलीमी
ये भी आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बहुत है मुझ को
अंजुम सलीमी
उठाए फिरता रहा मैं बहुत मोहब्बत को
अंजुम सलीमी
ठीक से याद भी नहीं अब तो
अंजुम सलीमी
शब-ए-जमाल सलामत रहें तिरे परी-ज़ाद
अंजुम सलीमी
मुझे पता है कि बर्बाद हो चुका हूँ मैं
अंजुम सलीमी
मेरी मिट्टी से बहुत ख़ुश हैं मिरे कूज़ा-गर
अंजुम सलीमी
मैं सब का सब मोहब्बत के लिए हूँ
अंजुम सलीमी
मैं दिल-ए-गिरफ़्ता तुझे गुनगुनाता रहता हूँ
अंजुम सलीमी
किसी तरह से नज़र मुतमइन नहीं होती
अंजुम सलीमी
किस ने आबाद किया है मरी वीरानी को
अंजुम सलीमी
कर रहा हूँ तुझे ख़ुशी से बसर
अंजुम सलीमी
इतना तरसाया गया मुझ को मोहब्बत से कि अब
अंजुम सलीमी
इश्क़ फ़रमा लिया तो सोचता हूँ
अंजुम सलीमी
हर तरफ़ तू नज़र आता है जिधर जाता हूँ
अंजुम सलीमी
एक ताबीर की सूरत नज़र आई है इधर
अंजुम सलीमी
दोस्तो मेरे लिए कोई भी अफ़्सुर्दा न हो
अंजुम सलीमी
तन्हाई का सफ़रनामा
अंजुम सलीमी
सारा शगुफ़्ता
अंजुम सलीमी
पुर्सा
अंजुम सलीमी
मुहाजिर परिंदों का स्वागत
अंजुम सलीमी
मेरी बे-लिबासी तुम्हारा पहनावा नहीं
अंजुम सलीमी
मैं और मेरी तन्हाई
अंजुम सलीमी
काश
अंजुम सलीमी
इंहिराफ़
अंजुम सलीमी
हम बे-वतन ख़्वाबों के जोलाहे हैं
अंजुम सलीमी
गिर्या
अंजुम सलीमी
एक क़दीम ख़याली की निगरानी में
अंजुम सलीमी
एक महबूस नज़्म
अंजुम सलीमी