Love Poetry (page 274)
एक और मुुहब्बत....
अंजुम सलीमी
आइंदगाँ की उदासी में
अंजुम सलीमी
ये मोहब्बत का जो अम्बार पड़ा है मुझ में
अंजुम सलीमी
उसे छूते हुए भी डर रहा था
अंजुम सलीमी
सुल्ह के बअ'द मोहब्बत नहीं कर सकता मैं
अंजुम सलीमी
सख़्त मुश्किल में किया हिज्र ने आसान मुझे
अंजुम सलीमी
सहर को खोज चराग़ों पे इंहिसार न कर
अंजुम सलीमी
सब को अपने ज़ेहन से झटका ख़ुद को याद किया
अंजुम सलीमी
मैं ख़ुद को मिस्मार कर के मलबा बना रहा हूँ
अंजुम सलीमी
ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ
अंजुम सलीमी
खींचा हुआ है गर्दिश-ए-अफ़्लाक ने मुझे
अंजुम सलीमी
ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है
अंजुम सलीमी
काग़ज़ था मैं दिए पे मुझे रख दिया गया
अंजुम सलीमी
इन दिनों ख़ुद से फ़राग़त ही फ़राग़त है मुझे
अंजुम सलीमी
इक दूजे को देर से समझा देर से यारी की
अंजुम सलीमी
दीवार पे रक्खा तो सितारे से उठाया
अंजुम सलीमी
दर्द-ए-विरासत पा लेने से नाम नहीं चल सकता
अंजुम सलीमी
चराग़ हाथ में हो तो हवा मुसीबत है
अंजुम सलीमी
चला हवस के जहानों की सैर करता हुआ
अंजुम सलीमी
अच्छे मौसम में तग-ओ-ताज़ भी कर लेता हूँ
अंजुम सलीमी
आईना साफ़ था धुँदला हुआ रहता था मैं
अंजुम सलीमी
रहे ज़रा दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता पर नज़र 'अंजुम'
अंजुम रूमानी
मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए
अंजुम रूमानी
किस की जबीं पे हैं ये सितारे अरक़ अरक़
अंजुम रूमानी
गुज़र रहे हैं गुज़रने वाले
अंजुम रूमानी
यहाँ तो फिर वही दीवार-ओ-दर निकल आए
अंजुम रूमानी
मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए
अंजुम रूमानी
जहाँ तक गया कारवान-ए-ख़याल
अंजुम रूमानी
जाए ख़िरद नहीं है कि फ़रज़ाना चाहिए
अंजुम रूमानी
जब भी कोई बात की आँसू ढलके साथ
अंजुम रूमानी