Love Poetry (page 276)

ये कैसी बात मिरा मेहरबान भूल गया

अंजुम ख़लीक़

तहय्युर है बला का ये परेशानी नहीं जाती

अंजुम ख़लीक़

सितमगरों से डरूँ चुप रहूँ निबाह करूँ

अंजुम ख़लीक़

पलकों तक आ के अश्क का सैलाब रह गया

अंजुम ख़लीक़

मिरे जुनूँ को हवस में शुमार कर लेगा

अंजुम ख़लीक़

कुछ उज़्र पस-ए-वा'दा-ख़िलाफ़ी नहीं रखते

अंजुम ख़लीक़

ख़ाक का रिज़्क़ यहाँ हर कस-ओ-ना-कस निकला

अंजुम ख़लीक़

कार-ए-हुनर सँवारने वालों में आएगा

अंजुम ख़लीक़

जहाँ सीनों में दिल शानों पे सर आबाद होते हैं

अंजुम ख़लीक़

जब तक फ़सील-ए-जिस्म का दर खुल न जाएगा

अंजुम ख़लीक़

हर शे'र से मेरे तिरा पैकर निकल आए

अंजुम ख़लीक़

दस्तार-ए-हुनर बख़्शिश-ए-दरबार नहीं है

अंजुम ख़लीक़

चाहे तू शौक़ से मुझे वहशत-ए-दिल शिकार कर

अंजुम ख़लीक़

बदल चुके हैं सब अगली रिवायतों के निसाब

अंजुम ख़लीक़

मिरी नज़र में आ गया है जब से इक सहीफ़ा-रुख़

अंजुम इरफ़ानी

चराग़ चाँद शफ़क़ शाम फूल झील सबा

अंजुम इरफ़ानी

अदा हुआ न कभी मुझ से एक सज्दा-ए-शुक्र

अंजुम इरफ़ानी

ये रात ढलते ढलते रख गई जवाब के लिए

अंजुम इरफ़ानी

तेशा-ब-कफ़ को आइना-गर कह दिया गया

अंजुम इरफ़ानी

रक़्स-ए-जुनूँ की गर्मी-ए-तासीर देखना

अंजुम इरफ़ानी

लहजे का रस हँसी की धनक छोड़ कर गया

अंजुम इरफ़ानी

जो न हों कुछ तशरीह-तलब कम होते हैं

अंजुम इरफ़ानी

इस ने देखा है सर-ए-बज़्म सितमगर की तरह

अंजुम इरफ़ानी

फ़सील-ए-जिस्म पे शब-ख़ूँ शरारतें तेरी

अंजुम इरफ़ानी

बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का

अंजुम इरफ़ानी

अब किसी अंधे सफ़र के लिए तय्यार हुआ चाहता है

अंजुम इरफ़ानी

अब इस सादा कहानी को नया इक मोड़ देना था

अंजुम इरफ़ानी

सुन कहा मान न मानेगा तो पछताएगा

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

मुतमइन बैठा हूँ ख़ुद को जान कर

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

किस का भेद कहाँ की क़िस्मत पगले किस जंजाल में है

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी