Love Poetry (page 277)

ज़ंजीर तो पैरों से थकन बाँधे हुए है

अंजुम बाराबंकवी

ज़हर लगता है ये आदत के मुताबिक़ मुझ को

अंजुम बाराबंकवी

वो जिस के नाम में लज़्ज़त बहुत है

अंजुम बाराबंकवी

किताब-ए-इश्क़ के जो मो'तबर रिसाले हैं

अंजुम बाराबंकवी

झूटी बातें झूटे लोग

अंजुम बाराबंकवी

हम सब को बताते रहते हैं ये बात पुरानी काम की है

अंजुम बाराबंकवी

दिलों से ख़ौफ़ के आसेब-ओ-जिन निकालता है

अंजुम बाराबंकवी

दिल का गुलाब मैं ने जिसे चूम कर दिया

अंजुम बाराबंकवी

ना-उमीदी कुफ़्र है

अंजुम आज़मी

वा'दा है कि जब रोज़-ए-जज़ा आएगा

अंजुम आज़मी

मेरी दुनिया में अभी रक़्स-ए-शरर होता है

अंजुम आज़मी

हम से क्या ख़ाक के ज़र्रों ही से पूछा होता

अंजुम आज़मी

फ़रेब ग़म ही सही दिल ने आरज़ू कर ली

अंजुम आज़मी

एक सौदा है लज़्ज़त-ए-ग़म है

अंजुम आज़मी

आलम-ए-वहशत-ए-तन्हाई है कुछ और नहीं

अंजुम आज़मी

अपनी जेब थी ख़ाली ख़ाली करते क्या

अंजुम अज़ीमाबादी

परछाइयों के शहर ज़मीं पर बसा दिए

अंजुम अंसारी

बनाए सब ने इसी ख़ाक से दिए अपने

अंजुम अंसारी

अनजाने ख़्वाब की ख़ातिर क्यूँ चैन गँवाया

अंजुम अंसारी

मुद्दत से कोई उन की तहरीर नहीं मिलती

अंजना संधीर

मूसा नहीं कि ताब न लाऊँ मैं हुस्न की

अनीसा बेगम

दयार-ए-इश्क़ में तन्हा रहा नहीं हरगिज़

अनीसा बेगम

मुसलमाँ ग़ौर कर क्यूँ आज तेरी

अनीसा बेगम

जो ज़ौक़-ए-नज़र हो तो तुर्की में आ कर

अनीसा बेगम

बहाए शबनम ने अश्क पैहम नसीम भरती है सर्द आहें

अनीसा बेगम

कीजिए हुनर का ज़िक्र क्या आबरू-ए-हुनर नहीं

अनीस देहलवी

माल-ए-दुनिया तलाश करना है

अनीस अब्र

लगा के दिल कोई कुछ पल अमीर रहता है

अनीस अब्र

लफ़्ज़ यूँ ख़ामुशी से लड़ते हैं

अनीस अब्र

हर एक पल मुझे दुख दर्द बे-शुमार मिले

अनीस अब्र