Love Poetry (page 264)

चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

'आरिफ़' अज़ल से तेरा अमल मोमिनाना था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

नज़र गुम हो गई जल्वों में 'आरिफ़'

आरिफ़ अब्बासी

चश्म-ए-मुश्ताक़ तमाशा-ए-करम चाहे है

आरिफ़ अब्बासी

मुझे महरूमियों का ग़म नहीं है

आरिफ़ अब्बास

मेरा बेटा तो है ग़ुरूर मिरा

आराधना प्रसाद

किसी परिंदे ने उड़ने का मन बनाया है

आराधना प्रसाद

बावरे मन की बावरी ख़ुशबू

आराधना प्रसाद

आज की तारीख़ में इंसाँ मुकम्मल कौन है

आराधना प्रसाद

ज़िंदगी मुझ को मिरी नज़रों में शर्मिंदा न कर

अक़ील शादाब

शायद कोई कमी मेरे अंदर कहीं पे है

अक़ील शादाब

मेरे ज़ेहन-ओ-दिल में फ़िक्र-ओ-फ़न में था

अक़ील शादाब

मताअ-ओ-माल न दे दौलत-ए-तबाही दे

अक़ील शादाब

मय-कशो जान के लाले नज़र आते हैं मुझे

अक़ील शादाब

हवस का रंग चढ़ा उस पे और उतर भी गया

अक़ील शादाब

बाइ'स-ए-अर्ज़-ए-हुनर कर्ब-ए-निहानी निकला

अक़ील शादाब

असर मिरी ज़बान में नहीं रहा

अक़ील शादाब

शायद कहीं इस प्यार में थोड़ी सी कमी है

अक़ील नोमानी

उन से भी कहाँ मेरी हिमायत में हिला सर

अक़ील नोमानी

तमन्नाएँ जवाँ थीं इश्क़ फ़रमाने से पहले

अक़ील नोमानी

हर इक रंज-ओ-ग़म से सुबुक-दोश हो जा

अक़ील नोमानी

अब भी कुछ लोग मोहब्बत पे यक़ीं रखते हैं

अक़ील दानिश

इस मरीज़-ए-ग़म-ए-ग़ुर्बत को सँभाला दे दो

अक़ील दानिश

हर इश्क़ के मंज़र में था इक हिज्र का मंज़र

अक़ील अब्बास जाफ़री

एहसास-ए-ज़ियाँ हम में से अक्सर में नहीं था

अक़ील अब्बास जाफ़री

हुस्न हर रंग में मख़्सूस कशिश रखता है

अनवापुल हसन अनवार

अब तिरे हिज्र में यूँ उम्र बसर होती है

अनवापुल हसन अनवार

सारे कुश्तों से जुदा ढंग इज़्तिराब-ए-दिल का है

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

मज़ा देता है याद आ कर तिरा बिस्मिल बना देना

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

खींच कर तलवार जब तर्क-ए-सितमगर रह गया

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब