Love Poetry (page 263)
हर किसी के लिए दुआ करना
आरिफ़ इशतियाक़
सुबू में अक्स-ए-रुख़-ए-माहताब देखते हैं
आरिफ़ इमाम
सुबू में अक्स-ए-रुख़-ए-माहताब देखते हैं
आरिफ़ इमाम
सब लहू जम गया उबाल के बीच
आरिफ़ इमाम
नफ़स की आमद-ओ-शुद को वबाल कर के भी
आरिफ़ इमाम
कुछ ऐसे ज़ख़्म-ए-ज़माना का इंदिमाल किया
आरिफ़ इमाम
हालत-ए-हर्फ़ किस ने जानी है
आरिफ़ इमाम
अपनी तकमील कर रहा हूँ मैं
आरिफ़ इमाम
ज़हराब-ए-तिश्नगी का मज़ा हम से पूछिए
आरिफ़ अंसारी
रहती है सबा जैसे ख़ुशबू के तआ'क़ुब में
आरिफ़ अंसारी
कुछ मिरी सुन कुछ अपनी सुना ज़िंदगी
आरिफ़ अंसारी
दिल क्या किसी की बात से अंदर से कट गया
आरिफ़ अंसारी
बाग़बाँ की बे-रुख़ी से नीले-पीले हो गए
आरिफ़ अंसारी
अपने अहबाब को अशआ'र सुनाने निकला
आरिफ़ अंसारी
अल्फ़ाज़ के पत्थर क्या फेंके गए पानी में
आरिफ़ अंसारी
था ए'तिमाद-ए-हुस्न से तू इस क़दर तही
आरिफ़ अब्दुल मतीन
चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
हयूले
आरिफ़ अब्दुल मतीन
ज़मीं से ता-ब-फ़लक कोई फ़ासला भी नहीं
आरिफ़ अब्दुल मतीन
वो कारवान-ए-बहाराँ कि बे-दरा होगा
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तितलियाँ रंगों का महशर हैं कभी सोचा न था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तिरे बाज़ूओं का सहारा तो ले लूँ मगर उन में भी रच गई है थकन
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तिरे बाज़ुओं का सहारा तो ले लूँ मगर इन में भी रच गई है थकन
आरिफ़ अब्दुल मतीन
रूह के जलते ख़राबे का मुदावा भी नहीं
आरिफ़ अब्दुल मतीन
मेरी सोच लरज़ उट्ठी है देख के प्यार का ये आलम
आरिफ़ अब्दुल मतीन
मैं जिस को राह दिखाऊँ वही हटाए मुझे
आरिफ़ अब्दुल मतीन
कितनी हसरत से तिरी आँख का बादल बरसा
आरिफ़ अब्दुल मतीन
जो उभरे वक़्त के साँचे में ढल के
आरिफ़ अब्दुल मतीन
हम भी नादाँ हैं समझते हैं कि छट जाएगी
आरिफ़ अब्दुल मतीन
छुपाए दिल में हम अक्सर तिरी तलब भी चले
आरिफ़ अब्दुल मतीन