Love Poetry (page 262)
ये शहर है वो शहर कि जिस में हैं बे-वज्ह कामयाब चेहरे
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
सूरज उगा तो ज़िंदगी की शाम हो गई
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
कभी जो ख़त्म न हो ऐसी ताज़गी दे दी
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
जो राह चलना है ख़ुद ही चुन लो यहाँ कोई राहबर नहीं है
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
जब सितारों की रिदा काँधे से सरकाती है रात
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
हम हैं और ज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँ है आज-कल
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
बदली हुई दुनिया की नज़र देख रहे हैं
अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ
ये दिन
आरिफ़ा शहज़ाद
वो क्या मस्लहत थी
आरिफ़ा शहज़ाद
वहाँ मैं नहीं थी
आरिफ़ा शहज़ाद
तुम्हें खोजती हैं जो आँखें
आरिफ़ा शहज़ाद
गिर्हें खुलती नहीं
आरिफ़ा शहज़ाद
देख लो गे ख़ुद!
आरिफ़ा शहज़ाद
तुझे मैं ज़िंदगी अपनी समझ रहा था मगर
आरिफ़ शफ़ीक़
अंधे अदम वजूद के गिर्दाब से निकल
आरिफ़ शफ़ीक़
'आरिफ़'-हुसैन धोका सही अपनी ज़िंदगी
आरिफ़ शफ़ीक़
तू ज़मीं पर है कहकशाँ जैसा
आरिफ़ शफ़ीक़
कैसा मातम कैसा रोना मिट्टी का
आरिफ़ शफ़ीक़
जो अपनी ख़्वाहिशों में तू ने कुछ कमी कर ली
आरिफ़ शफ़ीक़
जब भी दुश्मन बन के इस ने वार किया
आरिफ़ शफ़ीक़
हमें नज़दीक कब दिल की मोहब्बत खींच लाती है
आरिफ़ शफ़ीक़
दोज़ख़ भी क्या गुमान है जन्नत भी है फ़रेब
आरिफ़ शफ़ीक़
अंधे अदम वजूद के गिर्दाब से निकल
आरिफ़ शफ़ीक़
तुम्हें प्यार है, तो यक़ीन दो,
आरिफ़ इशतियाक़
ज़िंदगी यूँ करें बसर कब तक
आरिफ़ इशतियाक़
वो मेरे शहर में आया हुआ है
आरिफ़ इशतियाक़
तुम्हारी याद तारी हो रही है
आरिफ़ इशतियाक़
तुझे भी इश्क़ हुआ है ये किस ज़माने में
आरिफ़ इशतियाक़
तो मिरी ज़िंदगी बनोगी तुम
आरिफ़ इशतियाक़
मैं अब उक्ता गया हूँ फुर्क़तों से
आरिफ़ इशतियाक़