Love Poetry (page 265)
कहाँ मुमकिन है पोशीदा ग़म-ए-दिल का असर होना
अनवरी जहाँ बेगम हिजाब
इश्क़ पर दाना नहीं मोहताज-ए-तहरीक-ए-जमाल
अनवरी जहाँ बेगम हिजाब
आना भी आने वाले का अफ़्साना हो गया
अनवरी जहाँ बेगम हिजाब
कितने सुबुक-दिल हुए तुझ से बिछड़ने के बाद
अनवर सिद्दीक़ी
मेरी नज़र के लिए कोई रिवायत न थी
अनवर सिद्दीक़ी
क्या शहर में है गर्मी-ए-बाज़ार के सिवा
अनवर सिद्दीक़ी
हुजूम शोला में था हल्क़ा-ए-शरर में था
अनवर सिद्दीक़ी
डुबोए देता है ख़ुद-आगही का बार मुझे
अनवर सिद्दीक़ी
ज़िंदगी की ज़रूरतों का यहाँ
अनवर शऊर
ठहर सकती है कहाँ उस रुख़-ए-ताबाँ पे नज़र
अनवर शऊर
सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं
अनवर शऊर
मुस्कुराए बग़ैर भी वो होंट
अनवर शऊर
मुस्कुरा कर देख लेते हो मुझे
अनवर शऊर
मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में
अनवर शऊर
मेरे घर के तमाम दरवाज़े
अनवर शऊर
कोई ज़ंजीर नहीं तार-ए-नज़र से मज़बूत
अनवर शऊर
किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर
अनवर शऊर
जनाब के रुख़-ए-रौशन की दीद हो जाती
अनवर शऊर
जनाब के रुख़-ए-रौशन की दीद हो जाती
अनवर शऊर
इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह
अनवर शऊर
इश्क़ तो हर शख़्स करता है 'शुऊर'
अनवर शऊर
इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़
अनवर शऊर
फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
अनवर शऊर
चले आया करो मेरी तरफ़ भी!
अनवर शऊर
अच्छों को तो सब ही चाहते हैं
अनवर शऊर
ज़हर की चुटकी ही मिल जाए बराए दर्द-ए-दिल
अनवर शऊर
ये तन्हाई ये उज़्लत ऐ दिल ऐ दिल
अनवर शऊर
ये मत पूछो कि कैसा आदमी हूँ
अनवर शऊर
ये ख़ुद को देखते रहने की है जो ख़ू मुझ में
अनवर शऊर
यादों के बाग़ से वो हरा-पन नहीं गया
अनवर शऊर