Love Poetry (page 301)

न आते हमें इस में तकरार क्या थी

अल्लामा इक़बाल

मुसलमाँ के लहू में है सलीक़ा दिल-नवाज़ी का

अल्लामा इक़बाल

मिटा दिया मिरे साक़ी ने आलम-ए-मन-ओ-तू

अल्लामा इक़बाल

मीर-ए-सिपाह ना-सज़ा लश्करियाँ शिकस्ता सफ़

अल्लामा इक़बाल

मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ूमंदी

अल्लामा इक़बाल

मकतबों में कहीं रानाई-ए-अफ़कार भी है

अल्लामा इक़बाल

मजनूँ ने शहर छोड़ा तो सहरा भी छोड़ दे

अल्लामा इक़बाल

ला फिर इक बार वही बादा ओ जाम ऐ साक़ी

अल्लामा इक़बाल

कुशादा दस्त-ए-करम जब वो बे-नियाज़ करे

अल्लामा इक़बाल

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं

अल्लामा इक़बाल

ख़ुदी की शोख़ी ओ तुंदी में किब्र-ओ-नाज़ नहीं

अल्लामा इक़बाल

ख़ुदी हो इल्म से मोहकम तो ग़ैरत-ए-जिब्रील

अल्लामा इक़बाल

ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद ने मुझ को अता की नज़र हकीमाना

अल्लामा इक़बाल

ख़िरद के पास ख़बर के सिवा कुछ और नहीं

अल्लामा इक़बाल

करेंगे अहल-ए-नज़र ताज़ा बस्तियाँ आबाद

अल्लामा इक़बाल

कमाल-ए-तर्क नहीं आब-ओ-गिल से महजूरी

अल्लामा इक़बाल

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

अल्लामा इक़बाल

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही

अल्लामा इक़बाल

इश्क़ से पैदा नवा-ए-ज़िंदगी में ज़ेर-ओ-बम

अल्लामा इक़बाल

हज़ार ख़ौफ़ हो लेकिन ज़बाँ हो दिल की रफ़ीक़

अल्लामा इक़बाल

हर शय मुसाफ़िर हर चीज़ राही

अल्लामा इक़बाल

हर चीज़ है महव-ए-ख़ुद-नुमाई

अल्लामा इक़बाल

है याद मुझे नुक्ता-ए-सलमान-ए-ख़ुश-आहंग

अल्लामा इक़बाल

हादसा वो जो अभी पर्दा-ए-अफ़्लाक में है

अल्लामा इक़बाल

गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देख

अल्लामा इक़बाल

गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर

अल्लामा इक़बाल

फ़क़्र के हैं मोजज़ात ताज ओ सरीर ओ सिपाह

अल्लामा इक़बाल

इक दानिश-ए-नूरानी इक दानिश-ए-बुरहानी

अल्लामा इक़बाल

दिल-ए-बेदार फ़ारूक़ी दिल-ए-बेदार कर्रारी

अल्लामा इक़बाल