Love Poetry (page 300)
फ़रिश्ते आदम को जन्नत से रुख़्सत करते हैं
अल्लामा इक़बाल
एक नौ-जवान के नाम
अल्लामा इक़बाल
एक आरज़ू
अल्लामा इक़बाल
औरत
अल्लामा इक़बाल
ज़मीर-ए-लाला मय-ए-लाल से हुआ लबरेज़
अल्लामा इक़बाल
यूँ हाथ नहीं आता वो गौहर-ए-यक-दाना
अल्लामा इक़बाल
ये पीरान-ए-कलीसा-ओ-हरम ऐ वा-ए-मजबूरी
अल्लामा इक़बाल
ये पयाम दे गई है मुझे बाद-ए-सुब्ह-गाही
अल्लामा इक़बाल
ये हूरयान-ए-फ़रंगी दिल ओ नज़र का हिजाब
अल्लामा इक़बाल
ये दैर-ए-कुहन क्या है अम्बार-ए-ख़स-ओ-ख़ाशाक
अल्लामा इक़बाल
या रब ये जहान-ए-गुज़राँ ख़ूब है लेकिन
अल्लामा इक़बाल
वो हर्फ़-ए-राज़ कि मुझ को सिखा गया है जुनूँ
अल्लामा इक़बाल
वही मेरी कम-नसीबी वही तेरी बे-नियाज़ी
अल्लामा इक़बाल
तुझे याद क्या नहीं है मिरे दिल का वो ज़माना
अल्लामा इक़बाल
तू अभी रहगुज़र में है क़ैद-ए-मक़ाम से गुज़र
अल्लामा इक़बाल
था जहाँ मदरसा-ए-शीरी-ओ-शाहंशाही
अल्लामा इक़बाल
तिरी निगाह फ़रोमाया हाथ है कोताह
अल्लामा इक़बाल
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
अल्लामा इक़बाल
ताज़ा फिर दानिश-ए-हाज़िर ने किया सेहर-ए-क़ादिम
अल्लामा इक़बाल
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अल्लामा इक़बाल
शुऊर ओ होश ओ ख़िरद का मोआमला है अजीब
अल्लामा इक़बाल
समा सकता नहीं पहना-ए-फ़ितरत में मिरा सौदा
अल्लामा इक़बाल
फिर चराग़-ए-लाला से रौशन हुए कोह ओ दमन
अल्लामा इक़बाल
परेशाँ हो के मेरी ख़ाक आख़िर दिल न बन जाए
अल्लामा इक़बाल
निगाह-ए-फ़क़्र में शान-ए-सिकंदरी क्या है
अल्लामा इक़बाल
ने मोहरा बाक़ी ने मोहरा-बाज़ी
अल्लामा इक़बाल
नाला है बुलबुल-ए-शोरीदा तिरा ख़ाम अभी
अल्लामा इक़बाल
न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए
अल्लामा इक़बाल
न तख़्त-ओ-ताज में ने लश्कर-ओ-सिपाह में है
अल्लामा इक़बाल
न हो तुग़्यान-ए-मुश्ताक़ी तो मैं रहता नहीं बाक़ी
अल्लामा इक़बाल