Love Poetry (page 302)
दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है
अल्लामा इक़बाल
दिगर-गूँ है जहाँ तारों की गर्दिश तेज़ है साक़ी
अल्लामा इक़बाल
ढूँड रहा है फ़रंग ऐश-ए-जहाँ का दवाम
अल्लामा इक़बाल
अक़्ल गो आस्ताँ से दूर नहीं
अल्लामा इक़बाल
अपनी जौलाँ-गाह ज़ेर-ए-आसमाँ समझा था मैं
अल्लामा इक़बाल
अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं
अल्लामा इक़बाल
अमीन-ए-राज़ है मर्दान-ए-हूर की दरवेशी
अल्लामा इक़बाल
अफ़्लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर
अल्लामा इक़बाल
आलम-ए-आब-ओ-ख़ाक-ओ-बाद सिर्र-ए-अयाँ है तू कि मैं
अल्लामा इक़बाल
ग़म तेरा मुझे जाँ से गुज़रने नहीं देता
आल इमरान
बिखर के छूट न जाऊँ तिरी गिरफ़्त से मैं
अलीमुल्लाह हाली
सफ़र है ज़ेहन का तो कोई रहनुमा ले जा
अलीमुल्लाह हाली
सदाओं के जंगल में वो ख़ामुशी है
अलीमुल्लाह हाली
ना-शनासी का हमेशा ग़म रहा
अलीमुल्लाह हाली
जुदा किया तो बहुत ही हँसी-ख़ुशी उस ने
अलीमुल्लाह हाली
इश्क़ के कूचे में जब जाता है दिल करने को सैर
अलीमुल्लाह
अजब कुछ इश्क़ की ख़ुश-तर है वादी
अलीमुल्लाह
यार के दरसन के ख़ातिर जान और तन भूल जा
अलीमुल्लाह
यार जब नैनों में आया हू-ब-हू
अलीमुल्लाह
तेज़ी तिरे मिज़्गाँ की ये नश्तर से कहूँगा
अलीमुल्लाह
समझ के देखो ऐ आरिफ़ाँ तुम किया है हक़ ने ये भेद कैसा
अलीमुल्लाह
रक़ीब-ए-नफ़्स का मुख मोड़ता रह
अलीमुल्लाह
राह में हक़ के अज़ीज़ाँ आप को क़ुर्बां करो
अलीमुल्लाह
पिया के रुख़ की झलक का परतव किया है झलकार आफ़्ताबी
अलीमुल्लाह
पीतम के देखने के तमाशा को जाएँ चल
अलीमुल्लाह
नूर-ए-हक़ बे-हिजाब इश्क़-अल्लाह
अलीमुल्लाह
नको नसीहत करो अज़ीज़ाँ निगा है हमना मुहन सूँ मीता
अलीमुल्लाह
मुर्ग़ ज़ीरक अक़्ल का है इश्क़ का सय्याद शोख़
अलीमुल्लाह
ला-मकाँ लग आशिक़ाँ के इश्क़ का पर्वाज़ है
अलीमुल्लाह
लगा कर इश्क़ का कजरा नयन को
अलीमुल्लाह