Love Poetry (page 303)
कीता कहीं पुकार ऐ ग़ाफ़िल बिया बिया
अलीमुल्लाह
ख़यालात रंगीं नहीं बोलते उस को ज्यूँ बास फूलों के रंगों में रहिए
अलीमुल्लाह
जब पियारा गिला सुनाता है
अलीमुल्लाह
इश्क़ आ हम सूँ किया जब राम राम
अलीमुल्लाह
इलाही बुलबुल-ए-गुलज़ार-मअनी कर लिसाँ मेरा
अलीमुल्लाह
हुस्न का देख हर तरफ़ गुलज़ार
अलीमुल्लाह
ग़फ़लत में सोया अब तिलक फिर होवेगा होश्यार कब
अलीमुल्लाह
गर इश्क़ है तो देखने पिव को शिताब आ
अलीमुल्लाह
दिलबर को दिलबरी सूँ मना यार कर रखूँ
अलीमुल्लाह
'बहरी' पछाने नीं उसे गुल के सो वो दम-साज़ थे
अलीमुल्लाह
अक़्ल-ए-जुज़वी छोड़ कर ऐ यार फ़िक्र-ए-कुल करो
अलीमुल्लाह
अक़्ल को छोड़ इश्क़ में आ जा
अलीमुल्लाह
अपने से बे-समझ को हक़ की कहाँ पछानत
अलीमुल्लाह
अजब चंचल मिला है यार हमना
अलीमुल्लाह
आया है मगर इश्क़ में दिलदार हमारा
अलीमुल्लाह
किस तरह जाऊँ कि ये आए हुए रात में हैं
अली ज़ुबैर
अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं
अली ज़रयून
मन जिस का मौला होता है
अली ज़रयून
अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं
अली ज़रयून
राज़-ए-ग़म-ए-उल्फ़त को ये दुनिया न समझ ले
अली ज़हीर लखनवी
नफ़रत से मोहब्बत को सहारे भी मिले हैं
अली ज़हीर लखनवी
हमारी ज़िंदगी क्या है मोहब्बत ही मोहब्बत है
अली ज़हीर लखनवी
तुम से
अली ज़हीर लखनवी
ताज़ा मंज़र
अली ज़हीर लखनवी
न आसमाँ की कहानी न वाँ का क़िस्सा लिख
अली ज़हीर लखनवी
किसे बताएँ कि क्या ग़म रहा है आँखों में
अली ज़हीर लखनवी
दिल ये कहता है कि इक आलम-ए-मुज़्तर देखूँ
अली ज़हीर लखनवी
पूरी हुई जो हिज्र की मीआद आवेगा
अली यासिर
कुछ इस तरह वो दुआ-ओ-सलाम कर के गया
अली यासिर
पहले भी कौन साथ था
अली वजदान