Love Poetry (page 298)

यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम

अल्लामा इक़बाल

वजूद-ए-ज़न से है तस्वीर-ए-काएनात में रंग

अल्लामा इक़बाल

उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं

अल्लामा इक़बाल

उक़ाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में

अल्लामा इक़बाल

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

अल्लामा इक़बाल

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अल्लामा इक़बाल

सौ सौ उमीदें बंधती है इक इक निगाह पर

अल्लामा इक़बाल

समुंदर से मिले प्यासे को शबनम

अल्लामा इक़बाल

निगाह-ए-इश्क़ दिल-ए-ज़िंदा की तलाश में है

अल्लामा इक़बाल

मिरे जुनूँ ने ज़माने को ख़ूब पहचाना

अल्लामा इक़बाल

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं

अल्लामा इक़बाल

मैं जो सर-ब-सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा

अल्लामा इक़बाल

मैं जो सर-ब-सज्दा हुआ कभी तो ज़मीं से आने लगी सदा

अल्लामा इक़बाल

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में

अल्लामा इक़बाल

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही

अल्लामा इक़बाल

इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा

अल्लामा इक़बाल

इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में

अल्लामा इक़बाल

हुई न आम जहाँ में कभी हुकूमत-ए-इश्क़

अल्लामा इक़बाल

हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ी

अल्लामा इक़बाल

हर शय मुसाफ़िर हर चीज़ राही

अल्लामा इक़बाल

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़

अल्लामा इक़बाल

गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर

अल्लामा इक़बाल

फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का

अल्लामा इक़बाल

बे-ख़तर कूद पड़ा आतिश-ए-नमरूद में इश्क़

अल्लामा इक़बाल

अक़्ल को तन्क़ीद से फ़ुर्सत नहीं

अल्लामा इक़बाल

अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी

अल्लामा इक़बाल

अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी

अल्लामा इक़बाल

आईन-ए-जवाँ-मर्दां हक़-गोई ओ बे-बाकी

अल्लामा इक़बाल

ज़ोहद और रिंदी

अल्लामा इक़बाल

ज़ौक़ ओ शौक़

अल्लामा इक़बाल