Love Poetry (page 296)

कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे

अल्ताफ़ हुसैन हाली

कब्क ओ क़ुमरी में है झगड़ा कि चमन किस का है

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जुनूँ कार-फ़रमा हुआ चाहता है

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

इश्क़ को तर्क-ए-जुनूँ से क्या ग़रज़

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हश्र तक याँ दिल शकेबा चाहिए

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हक़ वफ़ा के जो हम जताने लगे

अल्ताफ़ हुसैन हाली

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

गो जवानी में थी कज-राई बहुत

अल्ताफ़ हुसैन हाली

ग़म-ए-फ़ुर्क़त ही में मरना हो तो दुश्वार नहीं

अल्ताफ़ हुसैन हाली

दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

दिल को दर्द-आश्ना किया तू ने

अल्ताफ़ हुसैन हाली

धूम थी अपनी पारसाई की

अल्ताफ़ हुसैन हाली

बात कुछ हम से बन न आई आज

अल्ताफ़ हुसैन हाली

अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं

अल्ताफ़ हुसैन हाली

आगे बढ़े न क़िस्सा-ए-इश्क़-ए-बुताँ से हम

अल्ताफ़ हुसैन हाली

धूप के साए

अल्ताफ़ गौहर

रात सुब्ह-ए-बहार होगी

अल्ताफ़ अहमद कुरेशी

गुम रहोगे कब तक अपनी ज़ात ही में

अलक़मा शिबली

जुनून-ए-शौक़-ए-मोहब्बत की आगही देना

अलक़मा शिबली

दश्त-दर-दश्त फिरा करता हूँ प्यासा हूँ मैं

अलक़मा शिबली

वाइ'ज़ सफ़र तो मेरा भी था रूह की तरफ़

आलोक यादव

प्यार का दोनों पे आख़िर जुर्म साबित हो गया

आलोक यादव

हुस्न की दिलकशी पे नाज़ न कर

आलोक यादव

दिलकशी थी उन्सियत थी या मोहब्बत या जुनून

आलोक यादव

यहाँ हो रहीं हैं वहाँ हो रहीं हैं

आलोक यादव

सरापा तिरा क्या क़यामत नहीं है?

आलोक यादव

सब्ज़ है पैरहन चाँद का आज फिर

आलोक यादव

रक़ाबत क्यूँ है तुम को आसमाँ से

आलोक यादव