Love Poetry (page 295)
ईंट दीवार से जब कोई खिसक जाती है
अल्ताफ़ परवाज़
टपके जो अश्क वलवले शादाब हो गए
अल्ताफ़ मशहदी
क़ौमी तराना
अल्ताफ़ मशहदी
लम्हात-ए-आज़ादी
अल्ताफ़ मशहदी
कौन उतरा नज़र के ज़ीने से
अल्ताफ़ मशहदी
तुम को हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त
अल्ताफ़ हुसैन हाली
ताज़ीर-ए-जुर्म-ए-इश्क़ है बे-सर्फ़ा मोहतसिब
अल्ताफ़ हुसैन हाली
क़ैस हो कोहकन हो या 'हाली'
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कहते हैं जिस को जन्नत वो इक झलक है तेरी
अल्ताफ़ हुसैन हाली
इश्क़ सुनते थे जिसे हम वो यही है शायद
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हम ने अव्वल से पढ़ी है ये किताब आख़िर तक
अल्ताफ़ हुसैन हाली
होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क-ए-इश्क़ की
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हर सम्त गर्द-ए-नाक़ा-ए-लैला बुलंद है
अल्ताफ़ हुसैन हाली
है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ
अल्ताफ़ हुसैन हाली
गुल-ओ-गुलचीं का गिला बुलबुल-ए-ख़ुश-लहजा न कर
अल्ताफ़ हुसैन हाली
फ़राग़त से दुनिया में हर दम न बैठो
अल्ताफ़ हुसैन हाली
बहुत जी ख़ुश हुआ 'हाली' से मिल कर
अल्ताफ़ हुसैन हाली
आगे बढ़े न क़िस्सा-ए-इश्क़-ए-बुताँ से हम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नशात-ए-उमीद
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मुनाजात-ए-बेवा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मर्सिया-ए-देहली-ए-मरहूम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हुब्ब-ए-वतन
अल्ताफ़ हुसैन हाली
बरखा-रुत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
वस्ल का उस के दिल-ए-ज़ार तमन्नाई है
अल्ताफ़ हुसैन हाली
उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
रंज और रंज भी तन्हाई का
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मैं तो मैं ग़ैर को मरने से अब इंकार नहीं
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कोई महरम नहीं मिलता जहाँ में
अल्ताफ़ हुसैन हाली
ख़ूबियाँ अपने में गो बे-इंतिहा पाते हैं हम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कर के बीमार दी दवा तू ने
अल्ताफ़ हुसैन हाली