Love Poetry (page 308)
नॉस्टेलजिया
अली इमरान
तिरे वस्ल पे तेरी क़ुर्बत पे ला'नत
अली इमरान
शाम घर जाएगी मैं किधर जाऊँगा
अली इमरान
पूछते हो तुम मैं कब कर के दिखलाऊँगा
अली इमरान
इतनी बार मोहब्बत करना कितना मुश्किल हो जाता है
अली इमरान
बारिश के घनघोर हवाले गिनता रहता हूँ
अली इमरान
अब कोई ग़म ही नहीं है जो रुलाए मुझ को
अली इमरान
किसी की आँख का तारा हुआ करते थे हम भी तो
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
रंग-ए-महफ़िल से फ़ुज़ूँ-तर मिरी हैरानी है
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
चमन में वो फ़रामोशी का मौसम था मैं ख़ुद को भी
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
याद इक दरीचा है
अली असग़र अब्बास
ख़्वाब इक परिंदा है
अली असग़र अब्बास
मुझी को पर्दा-ए-हस्ती में दे रहा है फ़रेब
अली अख़्तर अख़्तर
ज़िंदगी क्या है जो दिल हो तश्ना-ए-ज़ौक़-ए-वफ़ा
अली अख़्तर अख़्तर
हरीम-ए-काबा बना दी वो सर-ज़मीं मैं ने
अली अख़्तर अख़्तर
हरीम-ए-का'बा बना दी वो सर-ज़मीं मैं ने
अली अख़्तर अख़्तर
फ़रेब-ए-जल्वा कहाँ तक ब-रू-ए-कार रहे
अली अख़्तर अख़्तर
दिल की आरज़ू थी दर्द दर्द-ए-बे-दवा पाया
अली अख़्तर अख़्तर
उठेंगे मौत से पहले
अली अकबर नातिक़
सुर्मा हो या तारा
अली अकबर नातिक़
सफ़ीर-ए-लैला-4
अली अकबर नातिक़
सफ़ीर-ए-लैला-3
अली अकबर नातिक़
सफ़ीर-ए-लैला-2
अली अकबर नातिक़
सफ़ीर-ए-लैला-1
अली अकबर नातिक़
रह-ज़नी ख़ूब नहीं ख़्वाजा-सराओं के लिए
अली अकबर नातिक़
नाम ओ नसब
अली अकबर नातिक़
मुसीबत की ख़बरें
अली अकबर नातिक़
मिरे चराग़ बुझ गए
अली अकबर नातिक़
लुहार जानता नहीं
अली अकबर नातिक़
हुजूम-ए-गिर्या
अली अकबर नातिक़