Love Poetry (page 306)

ख़ूगर-ए-रू-ए-ख़ुश-जमाल हैं हम

अली सरदार जाफ़री

ख़िरद वालो जुनूँ वालों के वीरानों में आ जाओ

अली सरदार जाफ़री

इत्र-ए-फ़िरदौस-ए-जवाँ में ये बसाए हुए होंट

अली सरदार जाफ़री

इश्क़ का नग़्मा जुनूँ के साज़ पर गाते हैं हम

अली सरदार जाफ़री

फ़स्ल-ए-गुल फ़स्ल-ए-ख़िज़ाँ जो भी हो ख़ुश-दिल रहिए

अली सरदार जाफ़री

फ़रोग़-ए-दीदा-ओ-दिल लाला-ए-सहर की तरह

अली सरदार जाफ़री

फ़रोग़-ए-दीदा-ओ-दिल लाला-ए-सहर की तरह

अली सरदार जाफ़री

इक सुब्ह है जो हुई नहीं है

अली सरदार जाफ़री

दिल की आग जवानी के रुख़्सारों को दहकाए है

अली सरदार जाफ़री

चश्मा-ए-बद-मस्त को फिर शेवा-ए-दिल-दारी दे

अली सरदार जाफ़री

बैठे हैं जहाँ साक़ी पैमाना-ए-ज़र ले कर

अली सरदार जाफ़री

अभी और तेज़ कर ले सर-ए-ख़ंजर-ए-अदा को

अली सरदार जाफ़री

अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा

अली सरदार जाफ़री

आए हम 'ग़ालिब'-ओ-'इक़बाल' के नग़्मात के बा'द

अली सरदार जाफ़री

ये एक फ़ितरी अमल है

अली साहिल

वार्निंग

अली साहिल

सीमोन-दी-बोवा

अली साहिल

सीखने का अमल हमेशा जारी रहना चाहिए

अली साहिल

मुख़ासिमत

अली साहिल

मुकालिमा

अली साहिल

ये क्या कि ख़ल्क़ को पूरा दिखाई देता हूँ

अली मुज़म्मिल

तसव्वुर मुन्कशिफ़-अज़-बाम हो जाने से डरता हूँ

अली मुज़म्मिल

न माह-रू न किसी माहताब से हुई थी

अली मुज़म्मिल

ख़सारा-दर-ख़सारा कर लिया जाए

अली मुज़म्मिल

हर बुरे वक़्त के अफ़आ'ल बदल देता है

अली मुज़म्मिल

इक तुर्फ़ा तमाशा सर-ए-बाज़ार बनेगा

अली मुतहर अशअर

यानी ला-यानी

अली मोहम्मद फ़र्शी

उसी के लिए

अली मोहम्मद फ़र्शी

टूटम टूट गया

अली मोहम्मद फ़र्शी

सत्तर माओं का प्यार

अली मोहम्मद फ़र्शी