Love Poetry (page 307)
गुनाह
अली मोहम्मद फ़र्शी
गेबी
अली मोहम्मद फ़र्शी
दाओ
अली मोहम्मद फ़र्शी
मेहमान-दारी
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्ज़ारा-ए-जमाल की फ़ुर्सत कहाँ मिली
अली जव्वाद ज़ैदी
जब छेड़ती हैं उन को गुमनाम आरज़ुएँ
अली जव्वाद ज़ैदी
हम अहल-ए-दिल ने मेयार-ए-मोहब्बत भी बदल डाले
अली जव्वाद ज़ैदी
ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
अली जव्वाद ज़ैदी
होली
अली जव्वाद ज़ैदी
भूलती हुई याद
अली जव्वाद ज़ैदी
ज़ुल्मत-कदों में कल जो शुआ-ए-सहर गई
अली जव्वाद ज़ैदी
ज़र्रा-ए-ना-तापीदा की ख़्वाहिश-ए-आफ़ताब क्या
अली जव्वाद ज़ैदी
तेरे हल्के से तबस्सुम का इशारा भी तो हो
अली जव्वाद ज़ैदी
तय कर चुके ये ज़िंदगी-ए-जावेदाँ से हम
अली जव्वाद ज़ैदी
राह-ए-उल्फ़त में मिले ऐसे भी दीवाने मुझे
अली जव्वाद ज़ैदी
नींद आ गई थी मंज़िल-ए-इरफ़ाँ से गुज़र के
अली जव्वाद ज़ैदी
नया मय-कदे में निज़ाम आ गया
अली जव्वाद ज़ैदी
मंज़िल-ए-दिल मिली कहाँ ख़त्म-ए-सफ़र के बाद भी
अली जव्वाद ज़ैदी
कम-ज़र्फ़ एहतियात की मंज़िल से आए हैं
अली जव्वाद ज़ैदी
जो मक़्सद गिर्या-ए-पैहम का है वो हम समझते हैं
अली जव्वाद ज़ैदी
जवानी हरीफ़-ए-सितम है तो क्या ग़म
अली जव्वाद ज़ैदी
है ख़मोश आँसुओं में भी नशात-ए-कामरानी
अली जव्वाद ज़ैदी
गो वसीअ' सहरा में इक हक़ीर ज़र्रा हूँ
अली जव्वाद ज़ैदी
ग़ैर पूछें भी तो हम क्या अपना अफ़्साना कहें
अली जव्वाद ज़ैदी
इक आह-ए-ज़ेर-ए-लब के गुनहगार हो गए
अली जव्वाद ज़ैदी
दीन ओ दिल पहली ही मंज़िल में यहाँ काम आए
अली जव्वाद ज़ैदी
ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
अली जव्वाद ज़ैदी
आँखों में अश्क भर के मुझ से नज़र मिला के
अली जव्वाद ज़ैदी
आँख कुछ बे-सबब ही नम तो नहीं
अली जव्वाद ज़ैदी
विपंस ऑफ़ मास डेस्ट्रक्शन
अली इमरान