Love Poetry (page 309)

चरवाहे का जवाब

अली अकबर नातिक़

क़ैद-ख़ाने की हवा में शोर है आलाम का

अली अकबर नातिक़

कसे कजावे महमिलों के और जागा रात का तारा भी

अली अकबर नातिक़

कँवल हों आब में ख़ुश गुल सबा में शाद रहें

अली अकबर नातिक़

दिल के दाग़ में सीसा है और ज़ख़्म-ए-जिगर में ताँबा है

अली अकबर नातिक़

चाँदी वाले, शीशे वाले, आँखों वाले शहर में

अली अकबर नातिक़

अज़ल के क़िस्सा-गो ने दिल की जो उतारी दास्ताँ

अली अकबर नातिक़

आँखें थीं वीरान नज़र कैसे आता

अली अकबर मंसूर

हिज्र बना आज़ार सफ़र कैसे कटता

अली अकबर मंसूर

ज़रा हटे तो वो मेहवर से टूट कर ही रहे

अली अकबर अब्बास

सारा दिन बे-कार बैठे शाम को घर आ गए

अली अकबर अब्बास

पानी में भी प्यास का इतना ज़हर मिला है

अली अकबर अब्बास

मैं अपने वक़्त में अपनी रिदा में रहता हूँ

अली अकबर अब्बास

जो ख़ुद को पाएँ तो फिर दूसरा तलाश करें

अली अकबर अब्बास

ग़ुबार-ए-नूर है या कहकशाँ है या कुछ और

अली अकबर अब्बास

देखने में लगती थी भीगती सिमटती रात

अली अकबर अब्बास

अँधेरी बस्तियाँ रौशन मनारे डूब जाएँगे

अली अकबर अब्बास

रोके से कहीं हादसा-ए-वक़्त रुका है

अली अहमद जलीली

लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे

अली अहमद जलीली

ग़म से मंसूब करूँ दर्द का रिश्ता दे दूँ

अली अहमद जलीली

तुम जो आओगे तो मौसम दूसरा हो जाएगा

अली अहमद जलीली

रोके से कहीं हादसा-ए-वक़्त रुका है

अली अहमद जलीली

मुस्तहिक़ वो लज़्ज़त-ए-ग़म का नहीं

अली अहमद जलीली

लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे

अली अहमद जलीली

ग़म से मंसूब करूँ दर्द का रिश्ता दे दूँ

अली अहमद जलीली

फ़रेब-ए-निकहत-ओ-गुलज़ार से बचाओ मुझे

अली अहमद जलीली

एक खिड़की गली की खुली रात भर

अली अहमद जलीली

अब छलकते हुए साग़र नहीं देखे जाते

अली अहमद जलीली

आज जलती हुई हर शम्अ बुझा दी जाए

अली अहमद जलीली

वरक़ है मेरे सहीफ़े का आसमाँ क्या है

अली अब्बास उम्मीद