Love Poetry (page 355)
बन-बास
अहमद फ़राज़
ऐ मेरे वतन के ख़ुश-नवाओ
अहमद फ़राज़
ऐ मेरे सारे लोगो
अहमद फ़राज़
अभी हम ख़ूबसूरत हैं
अहमद फ़राज़
ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
अहमद फ़राज़
यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
अहमद फ़राज़
यूँ तो पहले भी हुए उस से कई बार जुदा
अहमद फ़राज़
ये तबीअत है तो ख़ुद आज़ार बन जाएँगे हम
अहमद फ़राज़
ये शहर सेहर-ज़दा है सदा किसी की नहीं
अहमद फ़राज़
ये बे-दिली है तो कश्ती से यार क्या उतरें
अहमद फ़राज़
वहशत-ए-दिल सिला-ए-आबला-पाई ले ले
अहमद फ़राज़
वफ़ा के बाब में इल्ज़ाम-ए-आशिक़ी न लिया
अहमद फ़राज़
उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया
अहमद फ़राज़
उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़
उस मंज़र-ए-सादा में कई जाल बंधे थे
अहमद फ़राज़
उस का अपना ही करिश्मा है फ़ुसूँ है यूँ है
अहमद फ़राज़
तुझ से मिल कर तो ये लगता है कि ऐ अजनबी दोस्त
अहमद फ़राज़
था अबस तर्क-ए-तअल्लुक़ का इरादा यूँ भी
अहमद फ़राज़
तेरी बातें ही सुनाने आए
अहमद फ़राज़
तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
अहमद फ़राज़
तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
अहमद फ़राज़
तरस रहा हूँ मगर तू नज़र न आ मुझ को
अहमद फ़राज़
तड़प उठूँ भी तो ज़ालिम तिरी दुहाई न दूँ
अहमद फ़राज़
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
अहमद फ़राज़
सुकूत-ए-शाम-ए-ख़िज़ाँ है क़रीब आ जाओ
अहमद फ़राज़
सू-ए-फ़लक न जानिब-ए-महताब देखना
अहमद फ़राज़
शो'ला था जल-बुझा हूँ हवाएँ मुझे न दो
अहमद फ़राज़
शगुफ़्त-ए-गुल की सदा में रंग-ए-चमन में आओ
अहमद फ़राज़
सारा शहर बिलकता है
अहमद फ़राज़
साक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले
अहमद फ़राज़