Love Poetry (page 354)
हवा में नश्शा ही नश्शा फ़ज़ा में रंग ही रंग
अहमद फ़राज़
हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है
अहमद फ़राज़
गुफ़्तुगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा
अहमद फ़राज़
'फ़राज़' इश्क़ की दुनिया तो ख़ूब-सूरत थी
अहमद फ़राज़
दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
अहमद फ़राज़
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
अहमद फ़राज़
अब तो ये आरज़ू है कि वो ज़ख़्म खाइए
अहमद फ़राज़
अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उमीदें
अहमद फ़राज़
आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
अहमद फ़राज़
ज़ेर-ए-लब
अहमद फ़राज़
वापसी
अहमद फ़राज़
तो बेहतर है यही
अहमद फ़राज़
तसलसुल
अहमद फ़राज़
तख़्लीक़
अहमद फ़राज़
सवाल
अहमद फ़राज़
सरहदें
अहमद फ़राज़
पहली आवाज़
अहमद फ़राज़
नामा-ए-जानाँ
अहमद फ़राज़
मुहासरा
अहमद फ़राज़
मयूरका
अहमद फ़राज़
मत क़त्ल करो आवाज़ों को
अहमद फ़राज़
ख़्वाबों के ब्योपारी
अहमद फ़राज़
कर गए कूच कहाँ
अहमद फ़राज़
कनीज़
अहमद फ़राज़
काली दीवार
अहमद फ़राज़
इंतिसाब
अहमद फ़राज़
हच-हाईकर
अहमद फ़राज़
हमदर्द
अहमद फ़राज़
दोस्ती का हाथ
अहमद फ़राज़
भली सी एक शक्ल थी
अहमद फ़राज़