Love Poetry (page 63)
बे-सबब हो के बे-क़रार आया
हम्माद नियाज़ी
माना वो छुपने वाला हर दिल में छुप जाएगा
हामिदुल्लाह अफ़सर
असर देखा दुआ जब रात-भर की
हामिदुल्लाह अफ़सर
अक्स है बे-ताबियों का दिल की अरमानों में क्यूँ
हामिदुल्लाह अफ़सर
ये चलती-फिरती सी लाशें शुमार करने को
हामिदी काश्मीरी
यक-ब-यक क्यूँ बंद दरवाज़े हुए
हामिदी काश्मीरी
शाम से ज़ोरों पे तूफ़ाँ है बहुत
हामिदी काश्मीरी
मुझ को मरने की कोई उजलत न थी
हामिदी काश्मीरी
लैल-ए-शब-ताब चटानों में नहीं
हामिदी काश्मीरी
ख़ुद ख़मोशी के हिसारों में रहे
हामिदी काश्मीरी
चाँद कोहरे के जज़ीरों में भटकता होगा
हामिदी काश्मीरी
यक़ीन से बाहर बिखरा सच
हमीदा शाहीन
उल्टा चक्कर
हमीदा शाहीन
तुलूअ' से पहले
हमीदा शाहीन
साहिर
हमीदा शाहीन
न जाने कब लिखा जाए
हमीदा शाहीन
मुझे विर्सा नहीं मिला
हमीदा शाहीन
लुग़त महदूद है
हमीदा शाहीन
लड़कियाँ और तितलियाँ
हमीदा शाहीन
हज़िर-ग़ाएब
हमीदा शाहीन
ग़म-गुसार
हमीदा शाहीन
प्यार ईसार वफ़ा शेर-ओ-हुनर की बातें
हमीदा शाहीन
मिरी दुनिया का मेहवर मुख़्तलिफ़ है
हमीदा शाहीन
इक जादूगर है आँखों की बस्ती में
हमीदा शाहीन
हमारी ख़्वाहिशों में सरगिरानी भी कहाँ थी
हामिद ज़हूर
चलो वापस चलें
हामिद यज़दानी
घूम रहे हैं आँगन आँगन चाँद हवा और मैं
हामिद यज़दानी
शहर-ए-तरब में आज अजब हादिसा हुआ
हामिद सरोश
साँस लेने के लिए ताज़ा हवा भेजी है
हामिद सरोश
रात काटी है जाग कर बाबा
हामिद सरोश