Love Poetry (page 65)
तबस्सुम में न ढल जाता गुदाज़ ग़म तो क्या करते
हमीद नागपुरी
क़ुबूल कर के तेरा ग़म ख़ुशी ख़ुशी मैं ने
हमीद नागपुरी
मुझे रहीन-ए-ग़म-ए-जाँ-नवाज़ रहने दे
हमीद नागपुरी
ख़ुद अपने जज़्ब-ए-मोहब्बत की इंतिहा हूँ मैं
हमीद नागपुरी
ख़ुद अपने आप से हम बे-ख़बर से गुज़रे हैं
हमीद नागपुरी
हर ज़र्रा चश्म-ए-शौक़-ए-सर-ए-रहगुज़र है आज
हमीद नागपुरी
फ़िक्र पाबंदी-ए-हालात से आगे न बढ़ी
हमीद नागपुरी
वो एक शख़्स कि गुमनाम था ख़ुदाई में
हमीद कौसर
नियाज़-ओ-नाज़ का पैकर न अर्श पर ठहरा
हमीद कौसर
कभी तो रंग-ए-हुस्न-ए-यार देखूँ
हमीद कौसर
छोड़िए छोड़िए ये बातें तो अफ़्साने हैं
हमीद जाज़िब
सीने में राज़-ए-इश्क़ छुपाया न जाएगा
हमीद जालंधरी
फिर गई इक और ही दुनिया नज़र के सामने
हमीद जालंधरी
सीने में राज़-ए-इश्क़ छुपाया न जाएगा
हमीद जालंधरी
कल शाम लब-ए-बाम जो वो जल्वा-नुमा था
हमीद जालंधरी
कभी अपनों की यूरिश थी कभी ग़ैरों का रेला था
हमीद जालंधरी
आ के वो मुझ ख़स्ता-जाँ पर यूँ करम फ़रमा गया
हमीद जालंधरी
शहर-ए-आरज़ू
हमीद अलमास
न सताइश की तमन्ना
हमीद अलमास
दरयूज़ा-गरी
हमीद अलमास
बर्फ़ की वादी
हमीद अलमास
यूँ भी क्या था और अब क्या रह गया
हमीद अलमास
याद माज़ी के चराग़ों को बुझाया न करो
हमीद अलमास
उस के करम से है न तुम्हारी नज़र से है
हमीद अलमास
सरहद-ए-गुल से निकल कर हम जुदा हो जाएँगे
हमीद अलमास
रख दिया है मिरी दहलीज़ पे पत्थर किस ने
हमीद अलमास
हर्फ़-ए-ग़ज़ल से रंग-ए-तमन्ना भी छीन ले
हमीद अलमास
घर है तो दर भी होगा दीवार भी रहेगी
हमीद अलमास
चुरा के मेरे ताक़ से किताब कोई ले गया
हमीद अलमास
कर्ब वहशत उलझनें और इतनी तन्हाई कि बस
हमदुन उसमानी