Love Poetry (page 66)
काम आसाँ है मगर देखिए दुश्वार भी है
हमदम कशमीरी
हम अपने आप को फिर आज़मा के देखेंगे
हमदम कशमीरी
हुआ है सामने आँखों के ख़ानदाँ आबाद
हमदम कशमीरी
एक क़तरा न कहीं ख़ूँ का बहा मेरे बअ'द
हमदम कशमीरी
मौसम-ए-हिज्र के आने के शिकायत नहीं की
हलीम कुरेशी
चर्चा हमारा इश्क़ ने क्यूँ जा-ब-जा किया
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
मरीज़-ए-इश्क़ की जुज़-मर्ग दुनिया में दवा क्यूँ हो
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
कुछ बात ही थी ऐसी कि थामे जिगर गए
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
गुदाज़-ए-दिल से परवाना हुआ ख़ाक
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
दर्द को रहने भी दे दिल में दवा हो जाएगी
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
चर्चा हमारा इश्क़ ने क्यूँ जा-ब-जा किया
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
बुलबुल को फिर चमन में लगा लाई बू-ए-गुल
हकीम सय्यद मोहम्मद ग़ाज़ीपुरी
वो मुझे छोड़ के इक शाम गए थे 'नासिर'
हकीम नासिर
उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी
हकीम नासिर
जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है
हकीम नासिर
ज़िंदगी को न बना लें वो सज़ा मेरे बाद
हकीम नासिर
मय-कशी गर्दिश-ए-अय्याम से आगे न बढ़ी
हकीम नासिर
कभी वो हाथ न आया हवाओं जैसा है
हकीम नासिर
जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है
हकीम नासिर
जब भी जलेगी शम्अ तो परवाना आएगा
हकीम नासिर
इश्क़ कर के देख ली जो बेबसी देखी न थी
हकीम नासिर
इस राह-ए-मोहब्बत में तो आज़ार मिले हैं
हकीम नासिर
ऐ दोस्त कहीं तुझ पे भी इल्ज़ाम न आए
हकीम नासिर
बाद-ए-सरसर है नसीम-ए-गुलिस्ताँ मेरे लिए
हकीम मोहम्मद हुसैन अहक़र
मुझ में थे जितने ऐब वो मेरे क़लम ने लिख दिए
हकीम मंज़ूर
हर एक आँख को कुछ टूटे ख़्वाब दे के गया
हकीम मंज़ूर
गिरेगी कल भी यही धूप और यही शबनम
हकीम मंज़ूर
अपनी नज़र से टूट कर अपनी नज़र में गुम हुआ
हकीम मंज़ूर
वो जो अब तक लम्स है उस लम्स का पैकर बने
हकीम मंज़ूर
टूट कर बिखरे न सूरज भी है मुझ को डर बहुत
हकीम मंज़ूर