Love Poetry (page 68)
हुस्न है काफ़िर बनाने के लिए
हैरत गोंडवी
हुस्न भी है पनाह में इश्क़ भी है पनाह में
हैरत गोंडवी
'हैरत' के दिल पे वार किया हाए क्या किया
हैरत गोंडवी
है इतना ही अब वास्ता ज़िंदगी से
हैरत गोंडवी
आईना देखता हूँ नज़र आ रहे हो तुम
हैरत गोंडवी
सुना है ज़ख़्मी-ए-तेग़-ए-निगह का दम निकलता है
हैरत इलाहाबादी
बोसा लिया जो चश्म का बीमार हो गए
हैरत इलाहाबादी
आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
हैरत इलाहाबादी
वस्ल की शब थी और उजाले कर रक्खे थे
हैदर क़ुरैशी
पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं
हैदर क़ुरैशी
मौत से पहले जहाँ में चंद साँसों का अज़ाब
हैदर क़ुरैशी
दरख़्तों पर परिंदे लौट आना चाहते हैं
हैदर क़ुरैशी
चाँद बन कर चमकने वाले ने
हैदर क़ुरैशी
वस्ल की शब थी और उजाले कर रक्खे थे
हैदर क़ुरैशी
उस दरबार में लाज़िम था अपने सर को ख़म करते
हैदर क़ुरैशी
तुम्हारे इश्क़ में किस किस तरह ख़राब हुए
हैदर क़ुरैशी
मेरे उस के दरमियाँ जो फ़ासला रक्खा गया
हैदर क़ुरैशी
लफ़्ज़ तेरी याद के सब बे-सदा कर आए हैं
हैदर क़ुरैशी
जो बस में है वो कर जाना ज़रूरी हो गया है
हैदर क़ुरैशी
फ़स्ल-ए-ग़म की जब नौ-ख़ेज़ी हो जाती है
हैदर क़ुरैशी
अंदर की दुनियाएँ मिला के एक नगर हो जाएँ
हैदर क़ुरैशी
अजीब कर्ब-ओ-बला की है रात आँखों में
हैदर क़ुरैशी
अब के उस ने कमाल कर डाला
हैदर क़ुरैशी
खींच देता मैं ज़माने पे मोहब्बत के नुक़ूश
हैदर अली जाफ़री
आए ठहरे और रवाना हो गए
हैदर अली जाफ़री
न सर छुपाने को घर था न आब-ओ-दाना था
हैदर अली जाफ़री
इश्क़ की अंजुमन की बात करें
हैदर अली जाफ़री
इर्तिकाब-ए-जुर्म शर की बात है
हैदर अली जाफ़री
होता फ़नकार-ए-जदीद और न शाएर होता
हैदर अली जाफ़री
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
हैदर अली आतिश