Love Poetry (page 70)
सब्ज़ा बाला-ए-ज़क़न दुश्मन है ख़ल्क़ुल्लाह का
हैदर अली आतिश
रुख़ ओ ज़ुल्फ़ पर जान खोया किया
हैदर अली आतिश
रुजूअ बंदा की है इस तरह ख़ुदा की तरफ़
हैदर अली आतिश
रोज़-ए-मौलूद से साथ अपने हुआ ग़म पैदा
हैदर अली आतिश
रफ़्तगाँ का भी ख़याल ऐ अहल-ए-आलम कीजिए
हैदर अली आतिश
क़ुदरत-ए-हक़ है सबाहत से तमाशा है वो रुख़
हैदर अली आतिश
क़द-ए-सनम सा अगर आफ़रीदा होना था
हैदर अली आतिश
पीरी से मिरा नौ दिगर-हाल हुआ है
हैदर अली आतिश
पयम्बर मैं नहीं आशिक़ हूँ जानी
हैदर अली आतिश
नाज़-ओ-अदा है तुझ से दिल-आराम के लिए
हैदर अली आतिश
ना-फ़हमी अपनी पर्दा है दीदार के लिए
हैदर अली आतिश
मुंतज़िर था वो तो जुस्त-ओ-जू में ये आवारा था
हैदर अली आतिश
मोहब्बत का तिरी बंदा हर इक को ऐ सनम पाया
हैदर अली आतिश
मिरे दिल को शौक़-ए-फ़ुग़ाँ नहीं मिरे लब तक आती दुआ नहीं
हैदर अली आतिश
मौत माँगूँ तो रहे आरज़ू-ए-ख़्वाब मुझे
हैदर अली आतिश
मय-ए-गुल-रंग से लबरेज़ रहें जाम सफ़ेद
हैदर अली आतिश
मगर उस को फ़रेब-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना आता है
हैदर अली आतिश
लिबास-ए-यार को मैं पारा-पारा क्या करता
हैदर अली आतिश
लख़्त-ए-जिगर को क्यूँकर मिज़्गान-ए-तर सँभाले
हैदर अली आतिश
क्या क्या न रंग तेरे तलबगार ला चुके
हैदर अली आतिश
कूचा-ए-दिलबर में मैं बुलबुल चमन में मस्त है
हैदर अली आतिश
कोई इश्क़ में मुझ से अफ़्ज़ूँ न निकला
हैदर अली आतिश
कोई अच्छा नहीं होता है बरी चालों से
हैदर अली आतिश
ख़्वाहाँ तिरे हर रंग में ऐ यार हमीं थे
हैदर अली आतिश
ख़ार मतलूब जो होवे तो गुलिस्ताँ माँगूँ
हैदर अली आतिश
कौन से दिल में मोहब्बत नहीं जानी तेरी
हैदर अली आतिश
काबा ओ दैर में है किस के लिए दिल जाता
हैदर अली आतिश
काम हिम्मत से जवाँ मर्द अगर लेता है
हैदर अली आतिश
जोश-ओ-ख़रोश पर है बहार-ए-चमन हनूज़
हैदर अली आतिश
जौहर नहीं हमारे हैं सय्याद पर खुले
हैदर अली आतिश