Love Poetry (page 69)

क़ैद-ए-मज़हब की गिरफ़्तारी से छुट जाता है

हैदर अली आतिश

न पाक होगा कभी हुस्न ओ इश्क़ का झगड़ा

हैदर अली आतिश

मेहंदी लगाने का जो ख़याल आया आप को

हैदर अली आतिश

मसनद-ए-शाही की हसरत हम फ़क़ीरों को नहीं

हैदर अली आतिश

कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा

हैदर अली आतिश

ईद-ए-नौ-रोज़ दिल अपना भी कभी ख़ुश करते

हैदर अली आतिश

भरा है शीशा-ए-दिल को नई मोहब्बत से

हैदर अली आतिश

बयाँ ख़्वाब की तरह जो कर रहा है

हैदर अली आतिश

अजब तेरी है ऐ महबूब सूरत

हैदर अली आतिश

ऐ सनम जिस ने तुझे चाँद सी सूरत दी है

हैदर अली आतिश

ऐ फ़लक कुछ तो असर हुस्न-ए-अमल में होता

हैदर अली आतिश

आसमान और ज़मीं का है तफ़ावुत हर-चंद

हैदर अली आतिश

आसार-ए-इश्क़ आँखों से होने लगे अयाँ

हैदर अली आतिश

ज़िंदे वही हैं जो कि हैं तुम पर मरे हुए

हैदर अली आतिश

ये किस रश्क-ए-मसीहा का मकाँ है

हैदर अली आतिश

यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया

हैदर अली आतिश

या-अली कह कर बुत-ए-पिंदार तोड़ा चाहिए

हैदर अली आतिश

वो नाज़नीं ये नज़ाकत में कुछ यगाना हुआ

हैदर अली आतिश

वहशत-ए-दिल ने किया है वो बयाबाँ पैदा

हैदर अली आतिश

वही चितवन की ख़ूँ-ख़्वारी जो आगे थी सो अब भी है

हैदर अली आतिश

उन्नाब-ए-लब का अपने मज़ा कुछ न पूछिए

हैदर अली आतिश

तुर्रा उसे जो हुस्न-ए-दिल-आज़ार ने किया

हैदर अली आतिश

तेरी जो याद ऐ दिल-ख़्वाह भूला

हैदर अली आतिश

ताज़ा हो दिमाग़ अपना तमन्ना है तो ये है

हैदर अली आतिश

तार-तार-ए-पैरहन में भर गई है बू-ए-दोस्त

हैदर अली आतिश

ताक़-ए-अबरू हैं पसंद-ए-तब्अ इक दिल-ख़्वाह के

हैदर अली आतिश

सूरत से इस की बेहतर सूरत नहीं है कोई

हैदर अली आतिश

शोहरा-ए-आफ़ाक़ मुझ सा कौन सा दीवाना है

हैदर अली आतिश

शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था

हैदर अली आतिश

शब-ए-फ़ुर्क़त में यार-ए-जानी की

हैदर अली आतिश