Love Poetry (page 61)
आइए आसमाँ की ओर चलें
हनीफ़ तरीन
ये फ़ज़ा-ए-नील-गूँ ये बाल-ओ-पर काफ़ी नहीं
हनीफ़ फ़ौक़
रात के दर पे ये दस्तक ये मुसलसल दस्तक
हनीफ़ फ़ौक़
रात ढलते ही सफ़ीरान-ए-क़मर आते हैं
हनीफ़ फ़ौक़
नसीम-ए-सुब्ह-ए-बहार आए दिल-ए-हज़ीं को क़रार आए
हनीफ़ फ़ौक़
मिरी हयात अगर मुज़्दा-ए-सहर भी नहीं
हनीफ़ फ़ौक़
क्या नज़र की हुश्यारी ख़ुद-असीर-ए-मस्ती है
हनीफ़ फ़ौक़
जिस्म-ओ-जाँ किस ग़म का गहवारा बने
हनीफ़ फ़ौक़
फ़ज़ाओं में कुछ ऐसी खलबली थी
हनीफ़ फ़ौक़
दिल-ए-नादाँ पे शिकायत का गुमाँ क्या होगा
हनीफ़ फ़ौक़
चश्म-ए-पुर-नम अभी मरहून-ए-असर हो न सकी
हनीफ़ फ़ौक़
आह-ओ-फ़रियाद से मा'मूर चमन है कि जो था
हनीफ़ फ़ौक़
पत्थरों से कब तलक बाँधेगी उम्मीद-ए-वफ़ा
हनीफ़ साजिद
जल्वा-गर सोचों में हैं कुछ आगही के आफ़्ताब
हनीफ़ साजिद
कुशूद-ए-कार की ख़ातिर ख़ुदा बदलते रहे
हनीफ़ नज्मी
जो इस ज़मीं से कभी फिर नुमू करूँगा मैं
हनीफ़ नज्मी
सब नज़र आते हैं चेहरे गर्द गर्द
हनीफ़ कैफ़ी
मुद्दतें गुज़रीं मुलाक़ात हुई थी तुम से
हनीफ़ कैफ़ी
कोई भी रुत हो मिली है दुखों की फ़स्ल हमें
हनीफ़ कैफ़ी
थे मिरे ज़ख़्मों के आईने तमाम
हनीफ़ कैफ़ी
की नज़र मैं ने जब एहसास के आईने में
हनीफ़ कैफ़ी
हर इक कमाल को देखा जो हम ने रू ब-ज़वाल
हनीफ़ कैफ़ी
बिखर के रेत हुए हैं वो ख़्वाब देखे हैं
हनीफ़ कैफ़ी
आरज़ूएँ कमाल-आमादा
हनीफ़ कैफ़ी
अभी न जाओ अभी रास्ते सजे भी नहीं
हनीफ़ असअदी
वो कम-सिनी में भी 'अख़्गर' हसीन था लेकिन
हनीफ़ अख़गर
जब भी उस ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ की हवा आती है
हनीफ़ अख़गर
इश्क़ में दिल का ये मंज़र देखा
हनीफ़ अख़गर
बे-शक असीर-ए-गेसू-ए-जानाँ हैं बे-शुमार
हनीफ़ अख़गर
आइने में है फ़क़त आप का अक्स
हनीफ़ अख़गर