Love Poetry (page 60)

साक़िया ऐसा पिला दे मय का मुझ को जाम तल्ख़

हक़ीर

मुझे अब मौत बेहतर ज़िंदगी से

हक़ीर

इश्क़ के फंदे से बचिए ऐ 'हक़ीर'-ए-ख़स्ता-दिल

हक़ीर

बुत को पूजूँगा सनम-ख़ानों में जा जा के तो मैं

हक़ीर

तिफ़्ली पीरी ओ नौजवानी हेच

हक़ीर

साक़िया ऐसा पिला दे मय का मुझ को जाम तल्ख़

हक़ीर

ना-तवाँ वो हूँ कि दम भर नहीं बैठा जाता

हक़ीर

हमारी वो वफ़ादारी कि तौबा

हक़ीर

दुश्मन हैं वो भी जान के जो हैं हमारे लोग

हक़ीर

ऐ यास जो तू दिल में आई सब कुछ हुआ पर कुछ भी न हुआ

हक़ीर

रंग ये है अब हमारे इश्क़ की तासीर का

हेंसन रेहानी

हर ज़र्रा है जमाल की दुनिया लिए हुए

हेंसन रेहानी

आज सौदा-ए-मोहब्बत की ये अर्ज़ानी है

हेंसन रेहानी

उन्हें देखते ही फ़िदा हो गए हम

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

उन के आने पे दिल फ़िदा होगा

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

तुम कभी माइल-ए-करम न हुए

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

न वो वलवले हैं दिल में न वो आलम-ए-जवानी

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

मुस्कुरा दोगे तो ये रात सँवर जाएगी

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

मुँह-ज़ोर हैं मग़रूर हैं पुर-कार नहीं हैं

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

ख़ुशी गर है तो क्या मातम नहीं है

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

कशाँ कशाँ लिए जाता है कू-ए-यार मुझे

हंस राज सचदेव 'हज़ीं'

हर ज़ख़्म-ए-कोहना वक़्त के मरहम ने भर दिया

हनीफ़ तरीन

''ख़्वाहिश बाज़ू फैलाती है''

हनीफ़ तरीन

''जब तर्सील बटन तक पहुँची''

हनीफ़ तरीन

दो-धारी तलवार

हनीफ़ तरीन

सुलगती याद से ख़ूँ अट न जाए

हनीफ़ तरीन

सिमटती शाम अगर दर्द को जगाएगी

हनीफ़ तरीन

नश्शा करने का बहाना हो गया

हनीफ़ तरीन

ख़िज़ाँ में ओढ़ के क़ौल-ओ-क़रार का मौसम

हनीफ़ तरीन

एहसास-ए-ना-रसाई से जिस दम उदास था

हनीफ़ तरीन