Love Poetry (page 73)
ऐ दिल ख़ुशी का ज़िक्र भी करने न दे मुझे
हफ़ीज़ मेरठी
क़सम निबाह की खाई थी उम्र भर के लिए
हफ़ीज़ जौनपुरी
परी थी कोई छलावा थी या जवानी थी
हफ़ीज़ जौनपुरी
काफ़िर-ए-इश्क़ को क्या दैर-ओ-हरम से मतलब
हफ़ीज़ जौनपुरी
जब मिला कोई हसीं जान पर आफ़त आई
हफ़ीज़ जौनपुरी
हसीनों से फ़क़त साहिब-सलामत दूर की अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
ज़माने का भरोसा क्या अभी कुछ है अभी कुछ है
हफ़ीज़ जौनपुरी
यूँ उठा दे हमारे जी से ग़रज़
हफ़ीज़ जौनपुरी
यूँ तो हसीन अक्सर होते हैं शान वाले
हफ़ीज़ जौनपुरी
ये सब कहने की बातें हैं कि ऐसा हो नहीं सकता
हफ़ीज़ जौनपुरी
यही मसअला है जो ज़ाहिदो तो मुझे कुछ इस में कलाम है
हफ़ीज़ जौनपुरी
याद है पहले-पहल की वो मुलाक़ात की बात
हफ़ीज़ जौनपुरी
याद है पहले-पहल की वो मुलाक़ात की बात
हफ़ीज़ जौनपुरी
वो हसीं बाम पर नहीं आता
हफ़ीज़ जौनपुरी
वो हम-कनार है जाम-ए-शराब हाथ में है
हफ़ीज़ जौनपुरी
वस्ल आसान है क्या मुश्किल है
हफ़ीज़ जौनपुरी
उस को आज़ादी न मिलने का हमें मक़्दूर है
हफ़ीज़ जौनपुरी
उन की ये ज़िद कि मिरे घर में न आए कोई
हफ़ीज़ जौनपुरी
उन को दिल दे के पशेमानी है
हफ़ीज़ जौनपुरी
सुन के मेरे इश्क़ की रूदाद को
हफ़ीज़ जौनपुरी
सुब्ह को आए हो निकले शाम के
हफ़ीज़ जौनपुरी
शिकवा करते हैं ज़बाँ से न गिला करते हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
शब-ए-वस्ल है बहस हुज्जत अबस
हफ़ीज़ जौनपुरी
शब-ए-विसाल ये कहते हैं वो सुना के मुझे
हफ़ीज़ जौनपुरी
शब-ए-विसाल लगाया जो उन को सीने से
हफ़ीज़ जौनपुरी
साथ रहते इतनी मुद्दत हो गई
हफ़ीज़ जौनपुरी
क़ासिद ख़िलाफ़-ए-ख़त कहीं तेरा बयाँ न हो
हफ़ीज़ जौनपुरी
पी हम ने बहुत शराब तौबा
हफ़ीज़ जौनपुरी
पत्थर से न मारो मुझे दीवाना समझ कर
हफ़ीज़ जौनपुरी
नाज़नीं जिन के कुछ नियाज़ नहीं
हफ़ीज़ जौनपुरी