Love Poetry (page 75)

बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है

हफ़ीज़ जौनपुरी

अजब ज़माने की गर्दिशें हैं ख़ुदा ही बस याद आ रहा है

हफ़ीज़ जौनपुरी

अफ़्सुर्दगी-ए-दिल से ये रंग है सुख़न में

हफ़ीज़ जौनपुरी

अदा परियों की सूरत हूर की आँखें ग़ज़ालों की

हफ़ीज़ जौनपुरी

अब तो नहीं आसरा किसी का

हफ़ीज़ जौनपुरी

आप ही से न जब रहा मतलब

हफ़ीज़ जौनपुरी

आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बरसों यूँ ज़ब्त से हम ने काम लिया

हफ़ीज़ जौनपुरी

आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बरसों यूँ ज़ब्त से हम ने काम लिया

हफ़ीज़ जौनपुरी

ज़िंदगी फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता को पा सकती नहीं

हफ़ीज़ जालंधरी

वो सरख़ुशी दे कि ज़िंदगी को शबाब से बहर-याब कर दे

हफ़ीज़ जालंधरी

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक

हफ़ीज़ जालंधरी

सुनाता है क्या हैरत-अंगेज़ क़िस्से

हफ़ीज़ जालंधरी

रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं

हफ़ीज़ जालंधरी

फिर दे के ख़ुशी हम उसे नाशाद करें क्यूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

नासेह को बुलाओ मिरा ईमान सँभाले

हफ़ीज़ जालंधरी

नासेह को बुलाओ मिरा ईमान सँभाले

हफ़ीज़ जालंधरी

ना-कामी-ए-इश्क़ या कामयाबी

हफ़ीज़ जालंधरी

मोहब्बत करो और निबाहो तो पूछूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

मिरा तजरबा है कि इस ज़िंदगी में

हफ़ीज़ जालंधरी

क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है

हफ़ीज़ जालंधरी

ख़ामोश हो गईं जो उमंगें शबाब की

हफ़ीज़ जालंधरी

इलाही एक ग़म-ए-रोज़गार क्या कम था

हफ़ीज़ जालंधरी

है मुद्दआ-ए-इश्क़ ही दुनिया-ए-मुद्दआ

हफ़ीज़ जालंधरी

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली

हफ़ीज़ जालंधरी

देखा न कारोबार-ए-मोहब्बत कभी 'हफ़ीज़'

हफ़ीज़ जालंधरी

बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी अच्छी नहीं

हफ़ीज़ जालंधरी

ब-ज़ाहिर सादगी से मुस्कुरा कर देखने वालो

हफ़ीज़ जालंधरी

अभी मीआद बाक़ी है सितम की

हफ़ीज़ जालंधरी

तौबा-नामा

हफ़ीज़ जालंधरी

शाएर

हफ़ीज़ जालंधरी