Sharab Poetry (page 45)

पेच-ओ-ताब

अमजद नजमी

अफ़्कार-ए-परेशाँ

अमजद नजमी

सुब्ह-दम आया तो क्या हंगाम-ए-शाम आया तो क्या

अमजद नजमी

सोज़ है दिल के दाग़ में अब तक

अमजद नजमी

कितना मुख़्तसर है ये ज़िंदगी का अफ़्साना

अमजद नजमी

जब कोई लेता है मेरे सामने नाम-ए-ग़ज़ल

अमजद नजमी

अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को

अमित शर्मा मीत

क्यूँ ख़राबात में लाफ़-ए-हमा-दानी वाइ'ज़

अमीरुल्लाह तस्लीम

कहने सुनने से मिरी उन की अदावत हो गई

अमीरुल्लाह तस्लीम

चारासाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वक़्त-ए-रफ़ू रोने लगा

अमीरुल्लाह तस्लीम

बढ़ गई मय पीने से दिल की तमन्ना और भी

अमीरुल्लाह तस्लीम

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

इल्तिजा

आमिर उस्मानी

तअ'ल्लुक़ात के सारे दिए बुझे हुए थे

आमिर नज़र

सुब्ह-ए-रौशन को अंधेरों से भरी शाम न दे

अमीता परसुराम 'मीता'

बनते हैं फ़रज़ाने लोग

अमीर क़ज़लबाश

तेरी मस्जिद में वाइज़ ख़ास हैं औक़ात रहमत के

अमीर मीनाई

न वाइज़ हज्व कर एक दिन दुनिया से जाना है

अमीर मीनाई

मस्जिद में बुलाते हैं हमें ज़ाहिद-ए-ना-फ़हम

अमीर मीनाई

वादा-ए-वस्ल और वो कुछ बात है

अमीर मीनाई

तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है

अमीर मीनाई

पिला साक़िया अर्ग़वानी शराब

अमीर मीनाई

मुझ मस्त को मय की बू बहुत है

अमीर मीनाई

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हम जो मस्त-ए-शराब होते हैं

अमीर मीनाई

हुआ जो पैवंद मैं ज़मीं का तो दिल हुआ शाद मुझ हज़ीं का

अमीर मीनाई

हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं

अमीर मीनाई

गुज़र को है बहुत औक़ात थोड़ी

अमीर मीनाई