गुल Poetry (page 29)

अंजाम ख़ुशी का दुनिया में सच कहते हो ग़म होता है

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

तुझ क़ैद से दिल हो कर आज़ाद बहुत रोया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

सदमा हर-चंद तिरे जौर से जाँ पर आया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ने ग़रज़ कुफ़्र से रखते हैं न इस्लाम से काम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नासेह को जेब सीने से फ़ुर्सत कभू न हो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मक़्दूर नहीं उस की तजल्ली के बयाँ का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मगर वो दीद को आया था बाग़ में गुल के

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कहते हैं लोग यार का अबरू फड़क गया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जो गुल है याँ सो उस गुल-ए-रुख़्सार साथ है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जिस दम वो सनम सवार होवे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

हस्ती को तिरी बस है मियाँ गुल की इशारत

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ग़ुंचे से मुस्कुरा के उसे ज़ार कर चले

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दिल मत टपक नज़र से कि पाया न जाएगा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बे-वज्ह नईं है आइना हर बार देखना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

अपने का है गुनाह बेगाने ने क्या किया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मता-ए-हर्फ़ भी ख़ुश्बू के मा-सिवा क्या है

सऊद उस्मानी

उन को है ए'तिदाल मुझे इंतिहा पसंद

सत्यपाल जाँबाज़

तुझ को मेरे क़ुर्ब में पा कर जलते हैं दीवाने लोग

सत्यपाल जाँबाज़

बहार-ए-गुल से अब दौर-ए-ख़िज़ाँ तक

सत्यपाल जाँबाज़

अगला सफ़र तवील नहीं

सत्यपाल आनंद

फ़ना की अंजुमन से

सरवत ज़ेहरा

बे-परों की तितली

सरवत ज़ेहरा

वक़्त के हाथों हिकायात-ए-अना भूल गए

सरवर आलम राज़

क्या तमाशा देखिए तहसील-ए-ला-हासिल में है

सरवर आलम राज़

ले आएगा इक रोज़ गुल ओ बर्ग भी 'सरवत'

सरवत हुसैन

ये होंट तिरे रेशम ऐसे

सरवत हुसैन

यक-ब-यक मंज़र-ए-हस्ती का नया हो जाना

सरवत हुसैन

क़िन्दील-ए-मह-ओ-मेहर का अफ़्लाक पे होना

सरवत हुसैन

कभी तेग़-ए-तेज़ सुपुर्द की कभी तोहफ़ा-ए-गुल-ए-तर दिया

सरवत हुसैन

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