पत्थर Poetry (page 16)

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

क़ाबील का साया

सहर अंसारी

इक आस का धुँदला साया है इक पास का तपता सहरा है

सहर अंसारी

वक़्त के रंगीं गुल-दस्ते को याद आएगा ठंडा हाथ

साग़र सिद्दीक़ी

वो सवाल-ए-लुत्फ़ पर पत्थर न बरसाएँ तो क्यूँ

साग़र निज़ामी

उस्ताद मर गए

साग़र ख़य्यामी

रोटी कपड़ा और मकान

साग़र ख़य्यामी

रहेगा प्यासों से पानी का फ़ासला कब तक

साग़र ख़य्यामी

इतना नाराज़ हो क्यूँ उस ने जो पत्थर फेंका

साग़र आज़मी

फूलों से बदन उन के काँटे हैं ज़बानों में

साग़र आज़मी

धूप में ग़म की मिरे साथ जो आया होगा

साग़र आज़मी

गाता हुआ पत्थर

सईदुद्दीन

साँस की धार ज़रा घुसती ज़रा काटती है

सईद शरीक़

किस के हाथों में हैं पत्थर कौन ख़ाली हाथ है

सईद अख़्तर

ये किस के हुस्न की जल्वागरी है

सईद अख़्तर

शहर के फ़ुट-पाथ पर कुछ चुभते मंज़र देखना

सईद अख़्तर

डूबते सूरज की सरगोशी

सईद अहमद

पत्थर को पूजते थे कि पत्थर पिघल पड़ा

सईद अहमद

ये क्या हुआ कि हर इक रस्म-ओ-राह तोड़ गए

सादिक़ इंदौरी

वो एक चेहरा जो उस से गुरेज़ कर जाता

सादिक़

रास्ते फैले हुए जितने भी थे पत्थर के थे

सदफ़ जाफ़री

लाख तक़दीर पे रोए कोई रोने वाला

सदा अम्बालवी

पहला पत्थर याद हमेशा रहता है

साबिर वसीम

पहला पत्थर याद हमेशा रहता है

साबिर वसीम

आहिस्ता बोलिएगा तमाशा खड़ा न हो

साबिर

क़लम को इस लिए तलवार करना

सबीहा सबा, पाकिस्तान

हो गई सारी पशेमानी अबस

सबा जायसी

और किस तरह उसे कोई क़बा दी जाए

सबा जायसी

आवाज़ के पत्थर जो कभी घर में गिरे हैं

सबा इकराम

कारवाँ लुट गया राहबर छुट गया रात तारीक है ग़म का यारा नहीं

सबा अफ़ग़ानी

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