शहर Poetry (page 79)

दाम-ए-ख़ुशबू में गिरफ़्तार सबा है कब से

अमजद इस्लाम अमजद

बंद था दरवाज़ा भी और अगर में भी तन्हा था मैं

अमजद इस्लाम अमजद

अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा

अमजद इस्लाम अमजद

जगमगा उट्ठा है रंग मंच

अमित गुप्ता

ख़ुदा की कौन सी है राह बेहतर जानता है

अमित अहद

ख़्वाब जो बिखर गए

आमिर उस्मानी

हम कि सरमाया-ए-ईक़ान लिए बैठे हैं

आमिर नज़र

एक इक तार-ए-नफ़स आशुफ़्ता-ए-आहंग था

आमिर नज़र

दरून-ए-जिस्म की दीवार से उभरती है

आमिर नज़र

उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़

अमीर क़ज़लबाश

पाईं हर एक राह-गुज़र पर उदासियाँ

अमीर क़ज़लबाश

नक़्श पानी पे बना हो जैसे

अमीर क़ज़लबाश

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

अमीर क़ज़लबाश

हर एक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

दर्द का शहर कहीं कर्ब का सहरा होगा

अमीर क़ज़लबाश

दामन पे लहू हाथ में ख़ंजर न मिलेगा

अमीर क़ज़लबाश

बंद आँखों से वो मंज़र देखूँ

अमीर क़ज़लबाश

है ख़मोशी ज़ुल्म-ए-चर्ख़-ए-देव-पैकर का जवाब

अमीर मीनाई

गले में हाथ थे शब उस परी से राहें थीं

अमीर मीनाई

धूप में कौन किसे याद किया करता है

अमीर इमाम

बन के साया ही सही सात तो होती होगी

अमीर इमाम

इस दौर से ख़ुलूस मोहब्बत वफ़ा न माँग

अमीर अहमद ख़ुसरव

एक उसी को देख न पाए वर्ना शहर की सड़कों पर

अमीक़ हनफ़ी

बम्बई रात समुंदर

अमीक़ हनफ़ी

आए बसंत

अमीक़ हनफ़ी

है नूर-ए-ख़ुदा भी यहाँ इरफ़ान-ए-ख़ुदा भी

अमीक़ हनफ़ी

दिल है वीरान बयाबाँ की तरह

अमीक़ हनफ़ी

बीन हवा के हाथों में है लहरे जादू वाले हैं

अमीक़ हनफ़ी

शोर करता फिर रहा हूँ ख़ुश्क पत्तों की तरह

अमीन राहत चुग़ताई

तीरगी ही तीरगी है बाम-ओ-दर में कौन है

अमीन राहत चुग़ताई

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