Ghazal Poetry (page 401)
देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ
निदा फ़ाज़ली
दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए
निदा फ़ाज़ली
चाहतें मौसमी परिंदे हैं रुत बदलते ही लौट जाते हैं
निदा फ़ाज़ली
बृन्दाबन के कृष्ण कन्हैया अल्लाह हू
निदा फ़ाज़ली
बिंदराबन के कृष्ण-कन्हैया अल्लाह-हू
निदा फ़ाज़ली
बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ
निदा फ़ाज़ली
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
निदा फ़ाज़ली
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
निदा फ़ाज़ली
अपना ग़म ले के कहीं और न जाया जाए
निदा फ़ाज़ली
अच्छी नहीं ये ख़ामुशी शिकवा करो गिला करो
निदा फ़ाज़ली
अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
निदा फ़ाज़ली
आनी जानी हर मोहब्बत है चलो यूँ ही सही
निदा फ़ाज़ली
आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया
निदा फ़ाज़ली
आएगा कोई चल के ख़िज़ाँ से बहार में
निदा फ़ाज़ली
ज़बान पर सभी की बात है फ़क़त सवार की
नीरज गोस्वामी
याद हर पल तुझ को करने का सिला पाने लगा
नीरज गोस्वामी
तुम्हारे ज़ेहन में गर खलबली है
नीरज गोस्वामी
नज़ाकत है न ख़ुशबू और न कोई दिलकशी ही है
नीरज गोस्वामी
नहीं है अरे ये बग़ावत नहीं है
नीरज गोस्वामी
मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिए
नीरज गोस्वामी
मुश्किलों की यही हैं बड़ी मुश्किलें
नीरज गोस्वामी
जिए ख़ुद के लिए गर हम मज़ा तब क्या है जीने में
नीरज गोस्वामी
इधर ये ज़बाँ कुछ बताती नहीं है
नीरज गोस्वामी
दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान है
नीरज गोस्वामी
बात सच-मुच में निराली हो गई
नीरज गोस्वामी
बा'द मुद्दत के वो मिला है मुझे
नीरज गोस्वामी
अब रिश्तों में गहराई
नीरज गोस्वामी
आप आँखों में बस गए जब से
नीरज गोस्वामी
उसी की रौशनी रहती है इस क़दर मुझ में
नीना सहर
तुम से जाना कि इक किताब हूँ मैं
नीना सहर