Ghazal Poetry (page 50)
वाँ नक़ाब उट्ठी कि सुब्ह-ए-हश्र का मंज़र खुला
यगाना चंगेज़ी
वहशत थी हम थे साया-ए-दीवार-ए-यार था
यगाना चंगेज़ी
उदासी छा गई चेहरे पे शम-ए-महफ़िल के
यगाना चंगेज़ी
ठोकरें खिलवाईं क्या-क्या पा-ए-बे-ज़ंजीर ने
यगाना चंगेज़ी
साया अगर नसीब हो दीवार-ए-यार का
यगाना चंगेज़ी
सलामत रहें दिल में घर करने वाले
यगाना चंगेज़ी
रौशन तमाम काबा ओ बुत-ख़ाना हो गया
यगाना चंगेज़ी
क़िस्सा किताब-ए-उम्र का क्या मुख़्तसर हुआ
यगाना चंगेज़ी
क़यामत है शब-ए-वादा का इतना मुख़्तसर होना
यगाना चंगेज़ी
मुझे दिल की ख़ता पर 'यास' शरमाना नहीं आता
यगाना चंगेज़ी
क्यूँ किसी से वफ़ा करे कोई
यगाना चंगेज़ी
ख़ुदी का नश्शा चढ़ा आप में रहा न गया
यगाना चंगेज़ी
ख़ुदाओं की ख़ुदाई हो चुकी बस
यगाना चंगेज़ी
ख़ुदा की मार वो अय्याम-ए-शोर-ओ-शर गुज़रे
यगाना चंगेज़ी
कारगाह-ए-दुनिया की नेस्ती भी हस्ती है
यगाना चंगेज़ी
काम दीवानों को शहरों से न बाज़ारों से
यगाना चंगेज़ी
जब हुस्न-ए-बे-मिसाल पर इतना ग़ुरूर था
यगाना चंगेज़ी
दुनिया का चलन तर्क किया भी नहीं जाता
यगाना चंगेज़ी
दिल लगाने की जगह आलम-ए-ईजाद नहीं
यगाना चंगेज़ी
दामन-ए-क़ातिल जो उड़ उड़ कर हवा देने लगे
यगाना चंगेज़ी
चलता नहीं फ़रेब किसी उज़्र-ख़्वाह का
यगाना चंगेज़ी
चले चलो जहाँ ले जाए वलवला दिल का
यगाना चंगेज़ी
बैठा हूँ पाँव तोड़ के तदबीर देखना
यगाना चंगेज़ी
अगर अपनी चश्म-ए-नम पर मुझे इख़्तियार होता
यगाना चंगेज़ी
अदब ने दिल के तक़ाज़े उठाए हैं क्या क्या
यगाना चंगेज़ी
आप से आप अयाँ शाहिद-ए-मअ'नी होगा
यगाना चंगेज़ी
आप में क्यूँकर रहे कोई ये सामाँ देख कर
यगाना चंगेज़ी
आँख दिखलाने लगा है वो फ़ुसूँ-साज़ मुझे
यगाना चंगेज़ी
वाइ'ज़ के मैं ज़रूर डराने से डर गया
वज़ीर अली सबा लखनवी
उन की रफ़्तार से दिल का अजब अहवाल हुआ
वज़ीर अली सबा लखनवी