ख्वाब Poetry (page 21)
मुझ से ये प्यास का सहरा नहीं देखा जाता
हामिद मुख़्तार हामिद
क़बा-ए-गर्द हूँ आता है ये ख़याल मुझे
हामिद जीलानी
भूल जा मत रह किसी की याद में खोया हुआ
हामिद जीलानी
तुम अपने ख़्वाब बचा कर रक्खो कि कल दुनिया
हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी
मंज़िल कहाँ है दूर तलक रास्ते हैं यार
हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी
जुदाइयों के तसव्वुर ही से रुलाऊँ उसे
हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी
हर-चंद दूर दूर वो हुस्न-ओ-जमाल है
हामिद इलाहाबादी
फ़रेब दे न कहीं अज़्म-ए-मुस्तक़िल मेरा
हामिद इलाहाबादी
तरब से हो आया हूँ और यास की तह तक डूब चुका हूँ
हमीद नसीम
मोहब्बत जादा है मंज़िल नहीं है
हमीद नसीम
तबस्सुम में न ढल जाता गुदाज़ ग़म तो क्या करते
हमीद नागपुरी
ख़ुद अपने आप से हम बे-ख़बर से गुज़रे हैं
हमीद नागपुरी
हुई मुद्दत कि उन को ख़्वाब में भी अब नहीं देखा
हमीद जालंधरी
कैसा ग़ज़ब ये ऐ दिल-ए-पुर-जोश कर दिया
हमीद जालंधरी
कभी अपनों की यूरिश थी कभी ग़ैरों का रेला था
हमीद जालंधरी
याद माज़ी के चराग़ों को बुझाया न करो
हमीद अलमास
वो सर ही क्या कि जिस में तुम्हारा न हो ख़याल
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
मरता भला है ज़ब्त की ताक़त अगर न हो
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
दर्द को रहने भी दे दिल में दवा हो जाएगी
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
चर्चा हमारा इश्क़ ने क्यूँ जा-ब-जा किया
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
बुलबुल को फिर चमन में लगा लाई बू-ए-गुल
हकीम सय्यद मोहम्मद ग़ाज़ीपुरी
हर एक आँख को कुछ टूटे ख़्वाब दे के गया
हकीम मंज़ूर
सारे चेहरे ताँबे के हैं लेकिन सब पर क़लई है
हकीम मंज़ूर
सफ़र ही कोई रहेगा न फ़ासला कोई
हकीम मंज़ूर
मेरे सामने मेरे घर का पूरा नक़्शा बिखरा है
हकीम मंज़ूर
ख़ुशबुओं की दश्त से हमसायगी तड़पाएगी
हकीम मंज़ूर
हर एक आँख को कुछ टूटे ख़्वाब दे के गया
हकीम मंज़ूर
भेजता हूँ हर रोज़ मैं जिस को ख़्वाब कोई अन-देखा सा
हकीम मंज़ूर
अपनी नज़र से टूट कर अपनी नज़र में गुम हुआ
हकीम मंज़ूर
हर चोट पर ज़माने की हम मुस्कुराए हैं
हैरत सहरवर्दी