ख्वाब Poetry (page 20)

पत्थरों से कब तलक बाँधेगी उम्मीद-ए-वफ़ा

हनीफ़ साजिद

जल्वा-गर सोचों में हैं कुछ आगही के आफ़्ताब

हनीफ़ साजिद

कुशूद-ए-कार की ख़ातिर ख़ुदा बदलते रहे

हनीफ़ नज्मी

तमाम आलम से मोड़ कर मुँह मैं अपने अंदर समा गया हूँ

हनीफ़ कैफ़ी

बिखर के रेत हुए हैं वो ख़्वाब देखे हैं

हनीफ़ कैफ़ी

बना के तोड़ती है दाएरे चराग़ की लौ

हनीफ़ कैफ़ी

आरज़ूएँ कमाल-आमादा

हनीफ़ कैफ़ी

मैं जो अपने हाल से कट गया तो कई ज़मानों में बट गया

हनीफ़ असअदी

अभी न जाओ अभी रास्ते सजे भी नहीं

हनीफ़ असअदी

यादों का शहर-ए-दिल में चराग़ाँ नहीं रहा

हनीफ़ अख़गर

तोड़ कर जोड़ दिया करते हो क्या करते हो

हनीफ़ अख़गर

इश्क़ में दिल का ये मंज़र देखा

हनीफ़ अख़गर

दिल की मिरे बिसात क्या एक दिया बुझा हुआ

हनीफ़ अख़गर

उम्र की अव्वलीं अज़ानों में

हम्माद नियाज़ी

सेहन-ए-आइंदा को इम्कान से धोए जाएँ

हम्माद नियाज़ी

जिस की सौंधी सौंधी ख़ुशबू आँगन आँगन पलती थी

हम्माद नियाज़ी

जब मुंडेरों पे परिंदों की कुमक जारी थी

हम्माद नियाज़ी

हुज्रा-ए-ख़्वाब से बाहर निकला

हम्माद नियाज़ी

हमारे बस में क्या है और हमारे बस में क्या नहीं

हम्माद नियाज़ी

यक़ीन से बाहर बिखरा सच

हमीदा शाहीन

उल्टा चक्कर

हमीदा शाहीन

प्यास दायरा बनाती है

हमीदा शाहीन

परदेसी

हमीदा शाहीन

न जाने कब लिखा जाए

हमीदा शाहीन

मिरी दुनिया का मेहवर मुख़्तलिफ़ है

हमीदा शाहीन

मलाल ज़र्द-क़बाई को धो रहा होगा

हमीदा शाहीन

मैं ने भेजी थी गुलाबों की बशारत उस को

हामिद सरोश

शहर-ए-तरब में आज अजब हादिसा हुआ

हामिद सरोश

साँस लेने के लिए ताज़ा हवा भेजी है

हामिद सरोश

मुझ से ये प्यास का सहरा नहीं देखा जाता

हामिद मुख़्तार हामिद