ख्वाब Poetry (page 22)
मोहब्बत में इंकार कितना हसीं है
हैरत गोंडवी
मेरे उस के दरमियाँ जो फ़ासला रक्खा गया
हैदर क़ुरैशी
इक ख़्वाब कि जो आँख भिगोने के लिए है
हैदर क़ुरैशी
अब के उस ने कमाल कर डाला
हैदर क़ुरैशी
आप लोगों के कहे पर ही उखड़ जाते हैं
हैदर क़ुरैशी
ज़ियारत होगी काबे की यही ताबीर है इस की
हैदर अली आतिश
तलब दुनिया को कर के ज़न-मुरीदी हो नहीं सकती
हैदर अली आतिश
मेहंदी लगाने का जो ख़याल आया आप को
हैदर अली आतिश
कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा
हैदर अली आतिश
बयाँ ख़्वाब की तरह जो कर रहा है
हैदर अली आतिश
आसार-ए-इश्क़ आँखों से होने लगे अयाँ
हैदर अली आतिश
यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया
हैदर अली आतिश
वहशी थे बू-ए-गुल की तरह इस जहाँ में हम
हैदर अली आतिश
उन्नाब-ए-लब का अपने मज़ा कुछ न पूछिए
हैदर अली आतिश
तुर्रा उसे जो हुस्न-ए-दिल-आज़ार ने किया
हैदर अली आतिश
शोहरा-ए-आफ़ाक़ मुझ सा कौन सा दीवाना है
हैदर अली आतिश
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
हैदर अली आतिश
सब्ज़ा बाला-ए-ज़क़न दुश्मन है ख़ल्क़ुल्लाह का
हैदर अली आतिश
रुजूअ बंदा की है इस तरह ख़ुदा की तरफ़
हैदर अली आतिश
रफ़्तगाँ का भी ख़याल ऐ अहल-ए-आलम कीजिए
हैदर अली आतिश
पयम्बर मैं नहीं आशिक़ हूँ जानी
हैदर अली आतिश
ना-फ़हमी अपनी पर्दा है दीदार के लिए
हैदर अली आतिश
मिरे दिल को शौक़-ए-फ़ुग़ाँ नहीं मिरे लब तक आती दुआ नहीं
हैदर अली आतिश
मौत माँगूँ तो रहे आरज़ू-ए-ख़्वाब मुझे
हैदर अली आतिश
मगर उस को फ़रेब-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना आता है
हैदर अली आतिश
कोई अच्छा नहीं होता है बरी चालों से
हैदर अली आतिश
जोश-ओ-ख़रोश पर है बहार-ए-चमन हनूज़
हैदर अली आतिश
हसरत-ए-जल्वा-ए-दीदार लिए फिरती है
हैदर अली आतिश
हंगाम-ए-नज़'अ महव हूँ तेरे ख़याल का
हैदर अली आतिश
ग़म नहीं गो ऐ फ़लक रुत्बा है मुझ को ख़ार का
हैदर अली आतिश